तिरुवनंतपुरम, 23 फरवरी (भाषा) केरल में वामपंथी सरकार ने सोमवार को राज्य विधानसभा में ‘नेटिविटी कार्ड’ विधेयक पेश किया और इसे ‘ऐतिहासिक और दुर्लभतम कानून’ बताया।
राजस्व मंत्री के राजन ने विपक्षी एकीकृत लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सदस्यों की अनुपस्थिति में सदन में मूल निवास संबंधी पहचान पत्र विधेयक प्रस्तुत किया। यूडीएफ ने शबरिमला सोना चोरी मामले को लेकर कार्यवाही का बहिष्कार किया था।
मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत राज्य के निवासी मूल निवास संबंधी प्रमाण पत्र जारी होने के कारण गर्व से खुद को केरलवासी घोषित कर सकेंगे। बाद में इस विधेयक को आगे की विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए विषय समिति को भेज दिया गया।
राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले साल दिसंबर में राज्य में एक स्थायी, फोटो-युक्त निवास संबंधी पहचान प्रमाण पत्र शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी व्यक्ति को राज्य में अपनी पहचान या निवास स्थान साबित करने के लिए संघर्ष न करना पड़े।
दिसंबर में घोषित योजना को कानूनी वैधता प्रदान करने वाले विधेयक को पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई।
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए राजन ने कहा कि इसे केंद्र द्वारा संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) को एकतरफा रूप से लागू करने की पृष्ठभूमि में लाया गया है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजयन ने स्पष्ट रूप से यह कह दिया है कि सीएए, जिसने अल्पसंख्यक समुदायों के मन में चिंता पैदा कर दी है, राज्य में लागू नहीं किया जाएगा।
राजन ने कहा, “नागरिकता और जन्मस्थान अलग-अलग अवधारणाएं हैं। वर्तमान में राज्य में जन्मस्थान प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं, लेकिन सरकार एक, कानूनी रूप से मान्य दस्तावेज जारी करने का इरादा रखती है जो किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से केरलवासी के रूप में मान्यता देगा, ठीक उसी तरह जैसे संविधान के तहत नागरिकता की गारंटी दी जाती है।”
उन्होंने कहा कि एक बार यह कार्ड जारी हो जाने के बाद, केरलवासी, चाहे वह वर्तमान में कहीं भी हो, गर्व के साथ खुद को मलयाली घोषित कर सकता है।
राजस्व मंत्री ने विपक्षी यूडीएफ की भी इस बात के लिए आलोचना की कि जब सदन इतने महत्वपूर्ण कानून पर विचार कर रहा है तो वे कार्यवाही का बहिष्कार कर रहे हैं।
भाषा आशीष मनीषा
मनीषा