नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की गई है, जिसमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किए गए परीक्षण ने उच्च क्षमता वाले ‘रिबन पैराशूट’ के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता को साबित किया है। रक्षा मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह परीक्षण 18 फरवरी को चंडीगढ़ में ‘टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लैबोरेटरी (टीबीआरएल) में डीआरडीओ के ‘रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड’ (आरटीआरएस) प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया।
इसमें कहा गया, ‘‘भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ने गगनयान कार्यक्रम के लिए ‘ड्रोग पैराशूट’ के सफल विशिष्टता स्तर भार परीक्षण के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।’’
मंत्रालय ने कहा कि इस परीक्षण से उच्च क्षमता वाले ‘रिबन पैराशूट’ के डिजाइन और निर्माण में भारत की विशेषज्ञता साबित हुई।
यह परीक्षण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, डीआरडीओ के ‘एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट’ और टीबीआरएल की विभिन्न टीमों के सहयोग से आयोजित किया गया।
आरटीआरएस एक विशेष गतिशील परीक्षण प्रतिष्ठान है जिसका उपयोग उच्च गति वाले वायुगतिकीय और बैलिस्टिक मूल्यांकन के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गगनयान ‘ड्रोग पैराशूट’ के सफल विशिष्टता परीक्षण पर डीआरडीओ, इसरो और उद्योग जगत की सराहना की है।
उन्होंने कहा कि यह परीक्षण आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने भी परीक्षण में शामिल टीमों को बधाई दी।
भाषा
नेत्रपाल पवनेश
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