नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के लिए शुक्रवार को जारी मतदान के बीच परिसरों में गहमा-गहमी का माहौल बना हुआ है और आखिरी क्षणों में भी उम्मीदवार और उनके समर्थक विद्यार्थियों को अपने पक्ष में करने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं।
छात्र संगठनों ने पर्चे बांटे, तख्तियां प्रदर्शित कीं और विद्यार्थियों से डूसू के चार केंद्रीय पदों तथा महाविद्यालय प्रतिनिधियों के चुनाव में उनके उम्मीदवारों को वोट देने की अपील की।
अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच दो पालियों में मतदान हो रहा है। पुलिस ने किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए महाविद्यालयों के बाहर अवरोधक लगाए हैं और विद्यार्थियों की तलाशी ली जा रही है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा)-स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच कड़े मुकाबले वाले चुनाव के नतीजे शनिवार को घोषित होंगे।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि ‘नॉर्थ कैंपस’ और ‘साउथ कैंपस’ में पुलिस एवं अर्धसैनिक बल के 2,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं।
किफायती एवं सुरक्षित आवास चुनाव में विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में शामिल है। इसके अलावा महाविद्यालयों में छात्रावासों का सुचारु संचालन, सस्ता भोजन एवं परिवहन, दिल्ली मेट्रो के किराये में रियायत और विद्यार्थियों के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को अधिक सुलभ बनाने की मांग भी उठाई गई है।
दिल्ली में लगातार बढ़ते किराये के कारण उच्च शिक्षा हासिल करने का खर्च बढ़ रहा है और कई विद्यार्थियों के लिए रहने की व्यवस्था एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र हर्ष पांडे ने कहा, ‘‘रहने की व्यवस्था हमारी पहली और सबसे प्रमुख मांग है। किराया बहुत अधिक है। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ महाविद्यालयों में छात्रावास हैं लेकिन या तो वे ठीक से संचालित नहीं हो रहे या बंद हैं। उन्हें फिर से खोला जाना चाहिए।’’
हंसराज कॉलेज में हिंदी (ऑनर्स) में बीए के द्वितीय वर्ष के एक विद्यार्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ और सहयोगी बनाया जाना चाहिए।
छात्र ने कहा, ‘‘छात्र अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं और कुछ को यहां की व्यवस्था समझने में समय लगता है, इसलिए प्रशासन को अधिक सुलभ होना चाहिए। चिकित्सा अवकाश जैसे मामलों में भी विद्यार्थी अक्सर कागजी कार्रवाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझ जाते हैं।’’
रामजस कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा कृति कुमार ने कहा, ‘‘दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई का खर्च अब केवल फीस तक सीमित नहीं है। किराया, भोजन, परिवहन और अन्य खर्च बहुत तेजी से बढ़ जाते हैं। हम चाहते हैं कि डूसू विद्यार्थियों, खासकर दूसरे राज्यों से दिल्ली आए छात्रों पर पड़ने वाले रोजमर्रा के आर्थिक दबावों का मुद्दा उठाए।’’
उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों के घोषणापत्रों में मेट्रो किराये में रियायत का मुद्दा वर्षों से शामिल रहा है और अब इसका उचित समाधान किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों ने दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करने और परिसर में बुनियादी सुविधाओं में सुधार के लिए भी कदम उठाए जाने की मांग की।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, चुनाव के लिए कुल 1,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) लगाई गई हैं जिनमें में से 960 ईवीएम का इस्तेमाल मतदान के लिए किया जा रहा है जबकि 40 मशीन को आरक्षित रखा गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी राज किशोर शर्मा ने बताया कि मतदान के दौरान 12 नियंत्रण कक्ष काम कर रहे हैं और ईवीएम में किसी तरह की तकनीकी खराबी आने पर उसे दूर करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम को पुलिस की सुरक्षा में ‘नॉर्थ कैंपस’ स्थित ‘यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम’ के बहुद्देश्यीय सभागार ले जाया जाएगा। शनिवार को मतगणना के समय मशीन खोली जाएंगी।’’
मतगणना शनिवार को होगी।
भाषा सिम्मी नरेश
नरेश