कोलकाता/ नयी दिल्ली, 11 अप्रैल (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विद्यालयों में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक पदों पर भर्ती में हुए घोटाले के सिलसिले में शनिवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के आवास पर पांच घंटे तक छापेमारी की कार्रवाई की। संघीय एजेंसी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
ईडी की टीम ने 23 और 29 अप्रैल को होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले उनके आवास की तलाशी ली।
केंद्रीय बलों द्वारा परिसर की घेराबंदी किये जाने के बाद ईडी के अधिकारी पूर्वाह्न करीब 10.45 बजे नकटला क्षेत्र में चटर्जी के आवास पर पहुंचे।
ईडी के एक अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने चटर्जी से पूछताछ भी की।
टीम शाम 4:30 बजे आवास से रवाना हुई, लेकिन पास की सड़क पर इंतजार कर रहे मीडियाकर्मियों से बात नहीं की। इस टीम में एक महिला अधिकारी भी शामिल थी।
पूर्व मंत्री मीडिया कर्मियों के अनुरोध के बावजूद अपने आवास से बाहर नहीं निकले।
ईडी ने मामले में 23 जुलाई, 2022 को पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था। उन्हें करीब तीन साल (39 महीने) से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद 11 नवंबर, 2025 को जमानत पर रिहा किया गया था।
पार्थ को अगस्त 2025 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के मामले में उच्चतम न्यायालय से जमानत मिली और इसके बाद अन्य मामलों में जमानत मिलने के बाद उन्हें कारागार से रिहा किया गया।
रिहाई से पहले उनका कोलकाता के एक निजी अस्पताल में इलाज हुआ था।
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के भर्ती घोटाले में जमानत पर रिहा होने के बाद चटर्जी ने ईडी द्वारा भेजे गए तीन समन का जवाब नहीं दिया, जिसके कारण छापेमारी आवश्यक हो गई थी।
एजेंसी की एक दूसरी टीम ने पार्थ के आवास में छापेमारी के दौरान ही एक अन्य आरोपी प्रसन्ना कुमार रॉय के राजारहाट स्थित कार्यालय की भी तलाशी ली। ईडी ने करोड़ों के नौकरी घोटाले में रॉय को बिचौलिए के तौर पर नामजद किया है।
इस मामले की जांच 22-23 जुलाई, 2022 को पार्थ के नकटला स्थित आवास और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के परिसर पर ईडी की छापेमारी के साथ शुरू हुई।
ईडी की छापेमारी के दौरान मुखर्जी के दो फ्लैट से 50 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और सोने के आभूषण जब्त किए गए। इस मामले में चटर्जी और मुखर्जी दोनों को गिरफ्तार किया गया।
राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चटर्जी पर सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों (समूह सी और डी) की गलत तरीके से नियुक्ति करने से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने का आरोप लगाया गया है।
तृणमूल ने उन्हें 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए बेहाला पश्चिम सीट से टिकट नहीं दिया है। वह 2006 से लगातार चार बार इस सीट से विधायक रहे हैं।
भाषा धीरज संतोष
संतोष