बंगाल के टेराकोटा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास तेज हों : भाजपा

बंगाल के टेराकोटा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास तेज हों : भाजपा

बंगाल के टेराकोटा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास तेज हों : भाजपा
Modified Date: August 10, 2026 / 12:22 pm IST
Published Date: August 10, 2026 12:22 pm IST

नयी दिल्ली, दस अगस्त (भाषा) भाजपा के राहुल सिन्हा ने पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के विष्णुपुर में स्थित ऐतिहासिक टेराकोटा मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए केंद्र सरकार से विशेष ध्यान देने की मांग करते हुए सोमवार को राज्यसभा में कहा कि यह मंदिर भारतीय संस्कृति, कला और स्थापत्य की अनूठी विरासत को दर्शाता है और इसे वैश्विक पहचान मिलनी चाहिए।

शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए राहुल सिन्हा ने कहा कि बांकुड़ा जिले में स्थित राधाकृष्ण टेराकोटा मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत से जुड़े कई चित्र उकेरे गए हैं, जो भारतीय पौराणिक परंपराओं और कला की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह मंदिर लगभग 17वीं सदी के आसपास बनवाया गया था और आज भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के साथ मौजूद है।

उन्होंने कहा कि 17वीं सदी के प्रसिद्ध टेराकोटा मंदिरों का निर्माण मुख्य रूप से मल्ल वंश के राजाओं विशेषकर राजा रघुनाथ सिंह, वीर हम्वीर और वीर सिंह ने करवाया था। उन्होंने कहा कि इस मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया शुरू हुए करीब 27 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया।

भाजपा सदस्य ने कहा कि टेराकोटा कला से निर्मित यह मंदिर दुनिया में अपनी तरह की अनूठी धरोहर है। इसकी स्थापत्य शैली और दीवारों पर बनी कलाकृतियां भारतीय इतिहास और संस्कृति की अमूल्य संपदा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है।

सिन्हा ने कहा कि यदि इस मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलता है तो इससे न केवल बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश की प्राचीन कला और परंपराओं को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने की अपील की।

भाषा मनीषा माधव

माधव


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