सूरत, 23 जून (भाषा) गुजरात के सूरत शहर में एक बुजुर्ग जोड़े ने नगर निकाय के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं पर उनका “आर्थिक उत्पीड़न” करने का आरोप लगाते हुए इच्छा-मृत्यु की इजाजत मांगी है।
श्याम गहलोत (73) और उनकी पत्नी मधु (68) ने हाल में अपनी दुकानें सील किए जाने के बाद सूरत के जिलाधिकारी तेजस परमार को पत्र लिखकर इच्छा-मृत्यु की इजाजत देने की मांग की है।
नगर निकाय के एक अधिकारी ने बताया कि दंपति की 11 दुकानों को सील कर दिया गया है, क्योंकि उन्हें गुजरात अनधिकृत विकास नियमितीकरण (जीआरयूडीए) अधिनियम, 2022 के तहत नियमित करवाना जरूरी है।
अधिकारी के मुताबिक, दुकानों के नियमितीकरण के लिए दंपति को कुछ दस्तावेज जमा करने होंगे।
गहलोत दंपति ने जिलाधिकारी को 19 जून को लिखे पत्र में कहा, “सूरत नगर निगम के उधना दक्षिण जोन के कार्यकारी अभियंता और कुछ राजनीतिक हस्तियों की ओर से लगातार किए जा रहे असहनीय शारीरिक, मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न के कारण इच्छा-मृत्यु की अनुमति देने का अनुरोध है।”
मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले गहलोत दंपति ने साल 2016 में एक हादसे में अपने परिवार के नौ सदस्यों को गंवा दिया था। वे अब सूरत के पांडेसारा इलाके में रहते हैं।
दंपति ने बमरोली ग्राम पंचायत में अलग-अलग भूखंड पर 12 दुकानें खरीदी थीं, जो बाद में सूरत नगर निगम (एसएमसी) के अधिकार क्षेत्र में आ गईं।
गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, “2021 में एसएमसी ने बिना कोई कारण बताए हमारी दुकानें सील कर दीं।”
उन्होंने बताया कि फैसले के खिलाफ वे गुजरात उच्च न्यायालय पहुंचे और पांच साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी।
गहलोत ने कहा, “उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हमने अपनी दुकानों में अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दमकल विभाग से संपर्क किया। लेकिन उन्होंने हमें बताया कि ये नियम सिर्फ बड़ी दुकानों पर लागू होते हैं। फिर भी, हमने आग बुझाने वाले यंत्र का इंतजाम किया और अपनी दुकानें खोल लीं।”
उन्होंने दावा किया कि 31 जनवरी 2026 को सील हटाए जाने के बाद एसएमसी अधिकारी 30 मई को वापस आए और बिना किसी नोटिस के 11 दुकानों को सील कर दिया।
गहलोत ने आरोप लगाया कि एसएमसी के कार्यकारी अभियंता भैरव देसाई ने समस्या के समाधान के लिए उनसे स्थानीय नेताओं से मिलने को कहा।
देसाई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “2021 में गहलोत की कुछ संपत्तियों को सील कर दिया गया था। हालांकि, एक संपत्ति का प्रभाव शुल्क मंजूर हो गया था, इसलिए उसे खोल दिया गया। बाकी संपत्तियों के प्रभाव शुल्क से जुड़े कागजात गहलोत को अभी जमा करने हैं।”
उन्होंने कहा कि गहलोत दंपत्ति और कुछ स्थानीय लोगों के बीच विवाद भी है।
भाषा पारुल नरेश
नरेश