नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग “भाजपा की एक इकाई” के तौर पर काम कर रहा है। पार्टी ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया मतदाता सूचियों में हेरफेर के जरिये “बहुमत हासिल करने” की “मोदी-शाह रणनीति” का हिस्सा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कोई भी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ नहीं है, बल्कि विरोध निर्वाचन आयोग के तरीके को लेकर है जिसके तहत वह इस प्रक्रिया का “प्रबंधन, समन्वय और हेरफेर” कर रहा है।
निर्वाचन आयोग ने लगातार कहा है कि एसआईआर का मकसद मृत, एक से अधिक प्रविष्टि वाले, स्थानांतरित और विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूचियों से हटाना है।
विपक्षी दलों की ओर से भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए जयराम ने कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और आम आदमी पार्टी (आप) समेत 24 पार्टियों ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि एसआईआर किस तरह चुनावी लोकतंत्र को “बर्बाद” कर रहा है। उन्होंने दावा किया है कि निर्वाचन आयोग की भूमिका खुलेआम पक्षपाती है, जो “भाजपा की ईकाई की तरह पेश आ रहा है” तथा गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “आदेश” पर काम कर रहा है।
कांग्रेस नेता ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा, “हम भारत के प्रधान न्यायाधीश की अंतरात्मा से अपील कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने में उच्चतम न्यायालय की बहुत अहम भूमिका है कि निर्वाचन आयोग पारदर्शी, जवाबदेह एवं निष्पक्ष तरीके से काम करे, जो हमारी मांगों में से एक है।”
जयराम ने कहा कि यह सुनिश्चित करने में शीर्ष अदालत की बहुत अहम भूमिका है कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित न किया जाए या ऐसे लोगों के नाम न हटा दिए जाएं, जो असल में भारतीय नागरिक हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बात से कौन इनकार कर सकता है कि भारत में सिर्फ भारतीयों को ही वोट देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “लेकिन जब लाखों भारतीय नागरिकों के नाम ही मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, तो इससे एसआईआर के मकसद पर सवाल उठते हैं।”
जयराम ने आरोप लगाया कि 2024 में मोदी को बहुमत नहीं मिलने और उनके “अल्पमत वाले प्रधानमंत्री” बनने के बाद भाजपा ने एसआईआर रूपी हथियार का सहारा लिया है।
उन्होंने कहा, “इसकी (एसआईआर) शुरुआत जून-जुलाई 2024 में हुई। पहले बिहार और महाराष्ट्र, फिर हरियाणा और पश्चिम बंगाल और अब सभी राज्यों में एसआईआर हो रहा है। तो यह एसआईआर भाजपा और मोदी-शाह की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद बहुमत हासिल करना और मतदाता सूची में इस तरह हेरफेर करना है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया जाए, जो स्वाभाविक रूप से भाजपा के बजाय दूसरी पार्टियों को वोट देते।”
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “यह बहुत बड़े पैमाने पर वोटों की चोरी है।”
कर्नाटक में एसआईआर अभ्यास पर जयराम ने कहा, “हमने कर्नाटक के सभी विधायकों के साथ बैठक की। हमने इस मुद्दे पर ‘जूम’ पर बैठक की। उनका (भाजपा) मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर विधानसभा क्षेत्र में 5,000 से 10,000 वोट हटा दिए जाएं। लेकिन हम बहुत सक्रिय हैं। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव में अभी दो साल बाकी हैं। हम यह सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं कि हमारे पार्टी संगठन की तरफ से हर जरूरी सावधानी बरती जाए।”
उन्होंने कहा, “हमारी कुछ चिंताएं हैं। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि एसआईआर प्रक्रिया ठीक से हो। हम यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि बिहार में भाजपा ने जो हासिल किया, वह यहां न दोहराया जाए। भाजपा पश्चिम बंगाल का चुनाव इसलिए जीत पाई, क्योंकि लाखों लोग, जो आमतौर पर तृणमूल कांग्रेस को वोट देते, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए दिए गए।”
जयराम ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया के खिलाफ कोई नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि मतदाता सूची में समय-समय पर बदलाव करना जरूरी है। हम उस तरीके का विरोध करते हैं, जिससे निर्वाचन आयोग पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन, समन्वय और हेर-फेर कर रहा है।”
जयराम ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग केंद्रीय गृह मंत्री के नियंत्रण वाले गृह मंत्रालय के “सहायक कार्यालय” की तरह काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, “यह असाधारण है, यह एक संवैधानिक संस्था है और जिस तरह से वे बात करते हैं, जिस तरह से वे विपक्षी दलों के साथ पेश आते हैं, उससे साफ है कि वे हम सभी के प्रति केवल तिरस्कार का भाव रखते हैं।”
निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया का तीसरा चरण शुरू कर दिया है, जिसमें 16 राज्यों और तीन केंद्र-शासित प्रदेशों के 36.73 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं।
जिन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में तीसरा चरण संचालित किया जा रहा है, उनमें दिल्ली, ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, तेलंगाना, पंजाब, कर्नाटक, मेघालय, महाराष्ट्र, झारखंड, नगालैंड, त्रिपुरा, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं। इनमें से चार राज्य-पंजाब, कर्नाटक, झारखंड और तेलंगाना विपक्ष शासित हैं।
बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, गोवा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा रही है।
भाषा पारुल संतोष
संतोष