कोलकाता, 16 फरवरी (भाषा) सोमवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने भर्ती, बेहतर वेतन और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन में, शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले और बी.एड या डी.एल.एड डिग्री धारक अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान से प्रशिक्षित उम्मीदवारों को प्राथमिक भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने विरोध प्रदर्शन के दौरान बर्तन भी बजाए।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि अप्रैल 2023 में जारी भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश में तीन महीने के भीतर लगभग 1,200 ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने “कोई खबर नहीं, कोई वोट नहीं” लिखे हुए बैनर ले रखे थे और राज्य प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की।
एक अन्य प्रदर्शन में, उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिये नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थी, जो पहले ही साक्षात्कार दे चुके हैं, रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की मांग करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा की ओर कूच करने लगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए दावा किया कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के सभी चरण पूरे कर लिए हैं।
इसी बीच, पश्चिम बंगाल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायक कल्याण संघ के सदस्यों ने सामाजिक कल्याण विभाग के मुख्यालय शैशाली परिसर के पास तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है, जिसमें वे “समान काम के लिए समान वेतन”, स्थायी नौकरी का दर्जा, पेंशन और गुजरात जैसे राज्यों में प्रदान किए जाने वाले लाभों के बराबर ग्रेच्युटी लाभों की मांग कर रही हैं।
पोषण ट्रैकर प्रणाली के तहत डिजिटल रिपोर्टिंग आवश्यकताओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करेंगी और न ही मौजूदा भत्ता स्वीकार करेंगी।
भाषा प्रशांत माधव
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