आबकारी नीति: न्यायमूर्ति शर्मा ने मामले से खुद को अलग करने से इनकार किया, केजरीवाल की याचिका खारिज

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आबकारी नीति: न्यायमूर्ति शर्मा ने मामले से खुद को अलग करने से इनकार किया, केजरीवाल की याचिका खारिज

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  • Publish Date - April 20, 2026 / 08:34 PM IST,
    Updated On - April 20, 2026 / 08:34 PM IST

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने सोमवार को आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया।

एक घंटे से अधिक समय तक हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के न्यायाधीश पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, और न्यायाधीश किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक नेता को बिना किसी आधार के किसी संस्था को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि किसी न्यायाधीश पर व्यक्तिगत हमला न्यायपालिका पर ही हमला होता है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने निष्कर्ष निकाला कि उन्हें हटाने की याचिकाओं में वर्णित विवरण अनुमानों और “कथित झुकावों” पर आधारित था।

न्यायाधीश ने कहा, “यह अदालत अपने और संस्था के लिए खड़ी रहेगी… मैं खुद को इस मामले से अलग नहीं करूंगी।”

केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में अपनी रिहाई के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका की सुनवाई कर रही न्यायाधीश के खिलाफ कई आपत्तियां उठाई थीं, जिनमें यह भी शामिल था कि उन्होंने पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था और मनीष सिसोदिया और के. कविता सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर राहत देने से भी इनकार कर दिया था।

केजरीवाल के अलावा, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी न्यायाधीश को मामले से अलग करने के लिए आवेदन दायर किए थे।

भाषा प्रशांत नरेश

नरेश