आबकारी घोटाला: नायर, व्यवसायी बोइनपल्ली को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया

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आबकारी घोटाला: नायर, व्यवसायी बोइनपल्ली को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया

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  • Publish Date - November 14, 2022 / 07:30 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:34 PM IST

नयी दिल्ली, 14 नवंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने आबकारी घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के संचार प्रभारी विजय नायर और व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली को सोमवार को ईडी की पांच दिन की हिरासत में भेज दिया, लेकिन इससे जुड़े सीबीआई की जांच वाले भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जमानत दे दी।

विशेष न्यायाधीश एम के नागपाल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसमें एजेंसी ने कहा था कि बड़ी साजिश और धन के लेन-देन का पता लगाने के लिए संबंधित आरोपियों से पूछताछ की जरूरत है।

धनशोधन रोधी एजेंसी ने यह भी कहा कि आरोपियों का गवाहों और दस्तावेजों से सामना कराए जाने की आवश्यकता है।

दिल्ली सरकार की अब वापस ली जा चुकी आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं से संबंधित सीबीआई की जांच वाले मामले में अदालत ने दोनों को दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का एक जमानतदार पेश करने की शर्त पर जमानत दे दी।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जहां नायर को सितंबर में गिरफ्तार किया था, वहीं बोइनपल्ली को पिछले महीने गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने के बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि नायर हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली के विभिन्न होटलों में ‘हवाला ऑपरेटर के माध्यम से अवैध धन’ की व्यवस्था करने के लिए अन्य सह-आरोपियों और शराब निर्माताओं तथा वितरकों के साथ बैठकें करने में शामिल था।

सीबीआई ने दावा किया है कि बोइनपल्ली भी बैठकों का हिस्सा था।

केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि बोइनपल्ली एक अन्य आरोपी शराब व्यवसायी समीर महेंद्रू के साथ धनशोधन की साजिश में शामिल था, जो गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में बंद है।

धनशोधन मामले में ईडी ने दिल्ली के जोर बाग स्थित शराब वितरक इंडोस्पिरिट ग्रुप के प्रबंध निदेशक महेंद्रू की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली और पंजाब में करीब तीन दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की थी।

मामले के अन्य आरोपियों में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्ण, उपायुक्त आनंद तिवारी और सहायक आयुक्त पंकज भटनागर शामिल हैं।

दोनों एजेंसियों के अनुसार, आबकारी नीति में संशोधन करते समय अनियमितता की गई और लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ दिया गया।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप