गैर कानूनी, गलत कार्य उजागर करना कदाचार नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

गैर कानूनी, गलत कार्य उजागर करना कदाचार नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

गैर कानूनी, गलत कार्य उजागर करना कदाचार नहीं माना जा सकता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Modified Date: August 3, 2026 / 10:49 pm IST
Published Date: August 3, 2026 10:49 pm IST

प्रयागराज, तीन अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी गैरकानूनी कार्य, गबन या जनहित से जुड़े मामले को सामने लाना मात्र कदाचार नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने इस टिप्पणी के साथ ही सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक नेता के कथित कृत्यों को उजागर करने वाली पोस्ट करने वाले सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक का निलंबन रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता के अनुसार, शिक्षक के खिलाफ एकमात्र आरोप यह था कि उन्होंने फिरोजाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह के संबंध में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था।

उन्होंने बताया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उन्हें पोस्ट हटाने का निर्देश दिया था लेकिन ऐसा करने से इनकार करने के बाद चार जुलाई को शिक्षक के निलंबन का आदेश जारी किया गया।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उनका निलंबन भाजपा जिलाध्यक्ष के कहने पर किया गया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट को कदाचार मान लिया गया जबकि जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के जवाब में याचिकाकर्ता ने विस्तृत स्पष्टीकरण पहले ही दे दिया था।

अदालत ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि निलंबन आदेश का आधार यह बनाया गया था कि याचिकाकर्ता ने सोशल मीडिया पर संदेश पोस्ट कर भाजपा जिलाध्यक्ष की कथित करतूतों को उजागर किया और अधिकारियों ने इस आचरण को कदाचार माना।

अदालत ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया यह विचार कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत किसी नागरिक द्वारा केवल किसी गैरकानूनी कार्य, गबन या जनहित से जुड़े मामले को सामने लाना कदाचार नहीं माना जा सकता, बशर्ते ऐसी अभिव्यक्ति कानून द्वारा प्रतिबंधित न हो या किसी सेवा नियम का उल्लंघन न करती हो।’’

उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई को दिए आदेश में कहा कि निलंबन आदेश कायम नहीं रह सकता और उसे रद्द किया जाता है।

भाषा सं राजेंद्र जितेंद्र

जितेंद्र


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