‘यूपीआई कर’ मामले से ध्यान भटकाने के लिए संसदीय समिति को लेकर गलत दावा किया गया: कांग्रेस

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‘यूपीआई कर’ मामले से ध्यान भटकाने के लिए संसदीय समिति को लेकर गलत दावा किया गया: कांग्रेस

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 03:13 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 03:13 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को इस दावे को गलत बताया कि वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति में शामिल उसके सदस्यों ने अधिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले का समर्थन किया था।

मुख्य विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘‘यूपीआई कर’’ के फैसले के बाद पैदा हुए ‘‘बड़े जनाक्रोश’’ से ध्यान भटकाने के लिए ‘‘बेहद घटिया’’ प्रयास कर रही है।

उसकी यह प्रतिक्रिया सरकार द्वारा राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर सवाल उठाए जाने के बाद आई, जिसमें उन्होंने 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले की आलोचना की थी। सरकार ने कहा कि संसद की स्थायी समिति ने ऐसी व्यवस्था का समर्थन किया था और समिति में कांग्रेस के सदस्यों ने भी इसका समर्थन किया था।

सरकार के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर)/राजस्व व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया था और कहा था कि इसे बिना देरी अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए।

भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि समिति में शामिल पांच कांग्रेस सांसदों पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल शर्मा और के. गोपीनाथ 12 अगस्त को रिपोर्ट को अंगीकार किए जाने के समय मौजूद थे और उनकी ओर से कोई असहमति दर्ज नहीं की गई।

गोगोई ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति में मोदी सरकार द्वारा हाल में घोषित यूपीआई कर के प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई थी।

लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गोगोई ने कहा कि जब वित्त विभाग के अधिकारियों ने वित्त संबंधी समिति के सदस्यों से मुलाकात की थी, तब विभाग के पास ‘‘यूपीआई कर’’ को लेकर कोई विशेष प्रस्ताव नहीं था।

उन्होंने कहा कि एमडीआर की जरूरत को लेकर सवाल उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई विशिष्ट या संतोषजनक जवाब नहीं था।

गोगोई ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘मैं इस बात को दोहराता हूं कि हाल की यूपीआई कर नीतियां छोटे भारतीय व्यापारियों, विक्रेताओं और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाती हैं तथा बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं। यूपीआई कर वापस लें। प्रधानमंत्री मोदी, आत्मसमर्पण करना बंद करें।’’

गोगोई की पोस्ट को टैग करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘समाचार गढ़ने वाली अर्थव्यवस्था, जो मोदी शासन में फली-फूली है, बेनकाब हो गई है। खुशी है कि आपने इसका खंडन किया।’’

रमेश ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि ‘‘यूपीआई कर’’ के फैसले के बाद पैदा हुए ‘‘बड़े जनाक्रोश’’ से ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार ‘‘बेहद घटिया’’ प्रयास कर रही है और आरोप लगाया कि यह फैसला ‘‘अमेरिकी कंपनियों और डोनाल्ड भाई (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) को खुश करने’’ के लिए लिया गया है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी सरकार पर निशाना साधा।

तिवारी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘दुर्भाग्य से, संसद की स्थायी समितियों की कार्यवाही, जिन्हें विशेषाधिकार प्राप्त माना जाता है, अब सरकार द्वारा राजनीतिक फायदा हासिल करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे सहयोगी गौरव गोगोई की बात सही है कि 15 अक्टूबर, 2026 से यूपीआई लेनदेन पर लगाए जाने वाले एमडीआर के संबंध में कोई विशिष्ट प्रस्ताव वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति के समक्ष कभी नहीं लाया गया था।’’

तिवारी ने कहा कि एमडीआर के सिद्धांत या वैचारिक आधार पर भी समिति की विभिन्न बैठकों के दौरान सदस्यों ने इसकी जरूरत और प्रभावशीलता समेत कई मुद्दों पर चिंताएं जताई थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह दावा करना कि समिति के ‘कुछ सदस्यों’ ने किसी खास उपाय का समर्थन किया था, संसद की समिति की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक चित्रण है।’’

भाषा हक हक नरेश

नरेश