कट-ऑफ के भीतर आवेदन करने वाले 11,594 एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण बढ़ाया गया:केंद्र

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कट-ऑफ के भीतर आवेदन करने वाले 11,594 एनजीओ का एफसीआरए पंजीकरण बढ़ाया गया:केंद्र

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  • Publish Date - January 25, 2022 / 06:09 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:54 PM IST

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) केंद्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि कट-ऑफ तिथि के भीतर आवेदन करने वाले 11,594 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पंजीकरण पहले ही बढ़ा दिया गया है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील पर गौर करते हुए न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने इस संबंध में कोई अंतरिम निर्देश पारित करने से इनकार किया कि सभी संगठनों का एफसीआरए पंजीकरण जो पिछले साल 30 सितंबर तक वैध था, उसे अगले आदेश तक जारी रखा जाना चाहिए।

विदेशी कोष प्राप्त करने के लिए किसी भी संगठन और एनजीओ के लिए एफसीआरए पंजीकरण अनिवार्य है।

मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि 11,594 एनजीओ ने कट-ऑफ तिथि के भीतर आवेदन किया था और उनके पंजीकरण को फिलहाल के लिए बढ़ा दिया गया है।

शीर्ष अदालत अमेरिका आधारित एक एनजीओ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र के उस कथित फैसले को रद्द करने का आग्रह किया गया है जिसके चलते 5,789 संस्थाओं ने एफसीआरए पंजीकरण गंवा दिया।

मेहता की दलील का संदर्भ देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में उसका ऐसा कोई अंतरिम निर्देश पारित करने का इरादा नहीं है जिसका कि आग्रह किया गया है।

दलीलों के दौरान, पीठ ने मेहता से पूछा कि क्या एफसीआरए पंजीकरण के लिए आवेदन करने वालों के नाम सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन प्रदर्शित होते हैं।

मेहता ने कहा कि उनके पास इस संबंध में कोई निर्देश नहीं है। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता संगठन अमेरिका के ह्यूस्टन आधारित है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि उनके पास वह जानकारी है जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और इसके अनुसार लगभग 6,000 एनजीओ का पंजीकरण नहीं बढ़ाया गया है।

पीठ ने हेगड़े को बताया कि सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि जिन संगठनों ने आवेदन किया, उनका पंजीकरण बढ़ा दिया गया है।

इसने कहा, ‘अगर उन 6,000 एनजीओ ने पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं करने का विकल्प चुना है, तो इसका मतलब है कि वे वर्तमान व्यवस्था में बने रहना नहीं चाहते हैं।’

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता उन अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन दे सकते हैं जिनके द्वारा उन पर विचार किया जा सकता है।

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश