बेची गई कार के अवैध इस्तेमाल पर प्राथमिकी : अदालत ने वकील को दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी

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बेची गई कार के अवैध इस्तेमाल पर प्राथमिकी : अदालत ने वकील को दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी

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  • Publish Date - June 23, 2026 / 06:03 PM IST,
    Updated On - June 23, 2026 / 06:03 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक वकील को उसकी उस कार के कथित गैर-कानूनी इस्तेमाल के मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की है, जिसे उसने एक पुरानी कारों के डीलर को बेच दिया था।

वकील शंकर कुमार झा ने कहा कि पुरानी कारों का व्यापार करने वाले प्लेटफॉर्म ‘स्पिनी’ के जरिये अपनी कार बेचने और बार-बार याद दिलाने के बावजूद इसे खरीदार के नाम पर अंतरित नहीं की गई थी। उन्होंने बताया कि इस महीने की शुरुआत में, उन्हें पुलिस से एक नोटिस मिला, जो आबकारी कानून के तहत अपराधों को अंजाम देने के लिए उसी गाड़ी के इस्तेमाल से जुड़ी एक प्राथमिकी के संबंध में था।

न्यायमूर्ति मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने 19 जून को झा की याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और पुरानी कारों के डीलर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय करते हुए आदेश दिया, ‘‘इस बीच, प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ वाहन के दुरुपयोग से संबंधित मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से रोका जाता है।’’

याचिका में झा ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता के साथ-साथ कार डीलर के गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने उन्हें कार बेचने के बावजूद गंभीर कानूनी कार्यवाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजात के माध्यम से दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने दलील दी कि कार खरीदने वाले ऑनलाइन मंच ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह बिक्री के बाद विक्रेताओं को पूरी सेवाएं प्रदान करता है, जिसमें संबंधित आरटीओ के साथ पंजीकरण प्रमाण पत्र में स्वामित्व का अंतरण (नाम बदलना) भी शामिल है।

याचिका में कहा गया है कि मालिकाना हक के बदलाव में हुई बेवजह देरी के कारण पहचान की चोरी, भरोसे का आपराधिक उल्लंघन, गलत व्यापारिक तरीके और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।

याचिका में दलील दी गई है कि 29 दिसंबर, 2023 को अपनी कार का वास्तविक कब्जा सौंपने और उसी तारीख से गाड़ी का मालिक न रहने की स्थिति में याचिकाकर्ता पर कोई आपराधिक, दीवानी या नियामक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।

याचिका में केंद्र सरकार से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया कि वह पुरानी कार बेचने वाले डीलरों के कामकाज को विनयमित करने के लिए एक विस्तृत नीति बनाए।

याचिकाकर्ता ने अधिकारियों को ‘स्पिनी’ के कामकाज के तरीकों की विस्तृत जांच करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया।

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप