उम्र या लिंग चाहे जो हो, गुमशुदगी के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए : न्यायालय
उम्र या लिंग चाहे जो हो, गुमशुदगी के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए : न्यायालय
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदगी के मामलों में राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का उसका आदेश हर व्यक्ति के सिलसिले में लागू होता है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि उसे यह जानकर हैरानी हुई है कि कुछ राज्य इस गलतफहमी में हैं कि “व्यक्ति” शब्द का मतलब सिर्फ बच्चों से है और इसमें वयस्क शामिल नहीं हैं।
पीठ ने पांच अगस्त के अपने आदेश में कहा, “हमें लगता है कि ऐसे राज्यों ने जानबूझकर और गलत नीयत से यह मुद्दा उठाया है। हमारे पिछले आदेश की भाषा स्पष्ट है। “व्यक्ति” शब्द का अर्थ हर व्यक्ति से है, चाहे उसकी उम्र या लिंग कुछ भी हो।”
उसने कहा, “अगर किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश ने आदेश का अक्षरश: और उसकी मूल भावना के अनुरूप पालन नहीं किया है, तो संबंधित मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा।”
शीर्ष अदालत ने संबंधित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को उसके समक्ष व्यक्तिरूप से पेश होने और ‘कारण बताओ हलफनामे’ दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया कि न्यायालय के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
पीठ ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों ने पहले के उसके निर्देशों के अनुसार हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, वे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना के दोषी हैं।
उसने कहा, “इसके मद्देनजर संबंधित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा।”
पीठ ने कहा, “उक्त अधिकारियों को न्यायालय के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा और ‘कारण बताओ’ हलफनामा दाखिल कर बताना होगा कि अदालत के विशेष निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।”
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर के लिए तय कर दी।
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने भारत में 47,000 बच्चों के लापता होने का संज्ञान लेते हुए 22 मई को देशभर की पुलिस को गुमशुदगी के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को चार हफ्ते के अंदर पूरी तरह से कामकाज में सक्षम बना दिया जाना चाहिए।
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

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