नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) विदेशी चिकित्सा स्नातकों (एफएमजी) की उचित चिंताओं पर ध्यान देने को तैयार है, लेकिन भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह बात बुधवार को कही।
यह बयान जून 2026 की विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच आया है। इस बीच, एनबीईएमएस द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा को अधिक पारदर्शी और अभ्यर्थी-अनुकूल बनाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं।
एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डॉक्टर पवन कपूर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने एफएमजीई परीक्षा साल में तीन बार आयोजित करने की संभावना की पड़ताल करने, परीक्षा शुल्क की समीक्षा, परीक्षा केंद्रों के बुनियादी ढांचे में सुधार करने और तकनीकी व कानूनी सुरक्षा उपायों के साथ अभ्यर्थियों को उनके द्वारा रिकॉर्ड किए गए जवाब देखने की अनुमति देने की सिफारिश की।
सूत्रों के मुताबिक, समिति ने जून की परीक्षा के लिए अनुग्रह या पूरक अंक देने की सिफारिश नहीं की, क्योंकि उसे ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह पता चले कि वीडियो-आधारित सवालों या परीक्षा के कुल कठिनाई स्तर का नतीजों पर कोई असर पड़ा हो।
प्रयास-वार नतीजे इस बहस को एक अहम संदर्भ देते हैं। जून 2026 में, पहली बार परीक्षा देने वाले 35.74 प्रतिशत अभ्यर्थी एफएमजीई में पास हुए, जबकि दूसरी बार परीक्षा देने वालों में यह आंकड़ा 21.45 प्रतिशत था और पांच से ज़्यादा बार कोशिश करने वालों में यह सिर्फ़ 3.29 प्रतिशत था।
दिसंबर 2025 में, पहली बार परीक्षा देने वालों के उत्तीर्ण होने की दर 47.53 प्रतिशत थी, जबकि पांच से ज़्यादा बार कोशिश करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह दर गिरकर 5.58 प्रतिशत हो गई।
एनबीईएमएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि केवल कुल उत्तीर्ण प्रतिशत के आधार पर यह तर्क नहीं दिया जा सकता कि परीक्षा देने वाले पूरे समूह को अनुचित प्रश्नपत्र का सामना करना पड़ा।
अधिकारी ने कहा, ‘‘उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी हो, साथ ही मरीज की सुरक्षा के लिए आवश्यक योग्यता का स्तर भी बना रहे।’’
उन्होंने कहा कि एनबीईएमएस अभ्यर्थियों की उचित चिंताओं पर विचार करने के लिए तैयार है।
अधिकारी के अनुसार, मुख्य बात यह है कि एफएमजीई भारत के बाहर प्रशिक्षण लेने वाले चिकित्सा स्नातकों के लिए एक अनुवीक्षण परीक्षा है, न कि कोई प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा।
विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नपत्र का एक अधिक संतुलित ढांचा सुझाया है, जिसमें 30 प्रतिशत आसान, 50 प्रतिशत मध्यम और 20 प्रतिशत कठिन सवाल हों; साथ ही, समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि औसत कठिनाई स्तर 5.5 से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।
भाषा नेत्रपाल अविनाश
अविनाश