भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति ने केंद्रीय योजना से जुड़े पद से दिया इस्तीफा

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भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति ने केंद्रीय योजना से जुड़े पद से दिया इस्तीफा

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 07:48 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 07:48 PM IST

अहमदाबाद, 23 सितंबर (भाषा) अहमदाबाद स्थित गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता ने संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच केंद्र प्रायोजित एक योजना की मुख्य अन्वेषक पद से इस्तीफा दे दिया है तथा अपने पास मौजूद 14 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विश्वविद्यालय को लौटा दी है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

नीरजा विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) योजना की प्रधान अन्वेषक थीं।

गुजरात विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति जगदीश जोशी ने बुधवार को बताया कि 16.53 करोड़ रुपये का अनुदान प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) की मुख्य अन्वेषक और पूर्व कुलपति नीरजा गुप्ता के खाते में जमा किया गया था। जोशी के मुताबिक, नीरजा ने 11 अगस्त को रजिस्ट्रार को ईमेल भेजकर मुख्य अन्वेषक पद से अपना इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने कहा, “खर्च की गई राशि का हिसाब करने के बाद उन्होंने बची हुई 14.60 करोड़ रुपये की राशि ‘डिमांड ड्राफ्ट’ के जरिए गुजरात विश्वविद्यालय को लौटा दी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 10 सितंबर को यह राशि नये प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) खाते में जमा कर दी।”

उन्होंने कहा कि शेष दो करोड़ रुपये का ऑडिट कराया जाएगा और इसकी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपी जाएगी।

इससे पहले कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के सदस्यों ने आरोप लगाया था कि गुजरात विश्वविद्यालय की कुलपति रहते हुए गुप्ता करोड़ों रुपये के घोटाले में शामिल थीं। एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने गुजरात विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पीयूष पटेल के इस्तीफे की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।

इस वर्ष जुलाई में विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में तीन साल का अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद भी गुप्ता केंद्रीय योजना की प्रधान अन्वेषक बनी रहीं।

इस बीच गुजरात विश्वविद्यालय के 10 अस्थायी कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जिन्हें नीरजा गुप्ता के कार्यकाल के दौरान नियुक्त किया गया था। यह कार्रवाई एक जांच समिति की सिफारिश पर की गई है, जो विश्वविद्यालय में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है।

भाषा प्रचेता अविनाश

अविनाश