दिल्ली के अस्पताल में चार मरीजों का ‘फोर-वे किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट’ किया गया
दिल्ली के अस्पताल में चार मरीजों का ‘फोर-वे किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट’ किया गया
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के एक अस्पताल ने देश के विभिन्न राज्यों के चार मरीजों का ‘फोर-वे किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट’ किया है, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य चिकित्सा कारणों से उन्हें सीधे तौर पर गुर्दे दान नहीं कर पा रहे थे। डॉक्टरों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अस्पताल ने बताया कि मरीजों के अपने रिश्तेदार गुर्दा दान करने के लिए तैयार थे, लेकिन चिकित्सकीय कारणों से सीधे प्रत्यारोपण संभव नहीं था। ऐसे में डॉक्टरों ने चारों दाताओं को दूसरे मरीजों से मैच किया और एक-दूसरे के लिए उपयुक्त गुर्दे उपलब्ध कराए।
साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल ने एक बयान में बताया कि सही दाता और मरीज की जोड़ी तय करने के लिए ‘एलायंस फॉर पेयर्ड किडनी डोनेशन’ (एपीकेडी) सॉफ्टवेयर की मदद ली गई।
इसने बताया कि इस प्रक्रिया में दिल्ली, जम्मू कश्मीर, बिहार और नगालैंड के आठ लोग शामिल थे जिनमें से चार गुर्दा दान करने वाले थे और अन्य चार गुर्दा प्रत्यारोपण कराने वाले मरीज थे। अस्पताल में इसके लिए एक ही दिन में आठ ऑपरेशन किए।
बयान के अनुसार, नगालैंड की 34-वर्षीय मरीज के लिए उनके 28-वर्षीय भाई का गुर्दा उपयुक्त नहीं था, क्योंकि उनके शरीर में भाई के गुर्दे के खिलाफ एंटीबॉडी बन गई थीं।
अस्पताल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के 47-वर्षीय मरीज को उनकी 42-वर्षीय बहन का गुर्दा इसलिए प्रत्यरोपित नहीं किया जा सकता था, क्योंकि दोनों के बीच ‘इम्यूनोलॉजिकल’ का मिलान नहीं हो रहा था।
दिल्ली की 46-वर्षीय मरीज अपने 49-वर्षीय पति से सीधे गुर्दा नहीं ले सकती थीं, क्योंकि गर्भावस्था के बाद उनके शरीर में पति से जुड़े कुछ एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी बन गई थीं जबकि बिहार के 34-वर्षीय मरीज अपनी 36-वर्षीय पत्नी से सीधे गुर्दा नहीं ले सकते थे, क्योंकि दोनों का ब्लड ग्रुप समान नहीं था।
अस्पताल ने कहा कि ऐसे में ‘पेयर-एक्सचेंज’ कार्यक्रम के जरिए हर दानदाता को दूसरे मरीज से मिलाया गया और इस तरह सभी चार मरीजों को उनके लिए उपयुक्त गुर्दा मिल सका।
बयान के मुताबिक इसके लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया काफी लंबी और मुश्किल रही और कई दस्तावेज जमा करने पड़े, बार-बार प्रस्तुतियां देनी पड़ीं और पूरी प्रक्रिया की गहन जांच हुई।
अस्पताल ने कहा कि आखिरकार, जरूरी अनुमति लेने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा और इस तरह कई महीनों की चिकित्सकीय तैयारी के साथ-साथ कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ी।
बयान के मुताबिक, इसके बाद जुलाई में किए गए इस ‘स्वैप ट्रांसप्लांट’ के लिए एक ही दिन में कुल आठ सर्जरी की गईं और ये सफल रही तथा मरीजों को बाद में अस्पताल से छुट्टी दे गई।
अस्पताल के ‘नेफ्रोलॉजी एवं रीनल ट्रांसप्लांट मेडिसिन’ विभाग के प्रमुख प्रो. दिनेश खुल्लर ने कहा कि ‘पेयर किडनी एक्सचेंज’ उन मरीजों के लिए एक नई उम्मीद हो सकती है, जिनके पास गुर्दा देने वाला व्यक्ति तो है, लेकिन ब्लड ग्रुप या अन्य मेडिकल कारणों से सीधे प्रत्यरोपण संभव नहीं है।
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव

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