गगनयान में देरी उड़ान कार्यक्रम की प्रक्रिया का हिस्सा, धैर्य जरूरी: अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप

गगनयान में देरी उड़ान कार्यक्रम की प्रक्रिया का हिस्सा, धैर्य जरूरी: अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप

गगनयान में देरी उड़ान कार्यक्रम की प्रक्रिया का हिस्सा, धैर्य जरूरी: अंतरिक्ष यात्री अंगद प्रताप
Modified Date: September 10, 2026 / 11:22 am IST
Published Date: September 10, 2026 11:22 am IST

बेंगलुरु, 10 सितंबर (भाषा) गगनयान मिशन के लिए चयनित अंतरिक्ष यात्री दल में शामिल ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप ने बुधवार को कहा कि मिशन में देरी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की प्रक्रिया का हिस्सा है और मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए धैर्य जरूरी है।

गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल प्रताप ने कहा कि सभी अंतरिक्ष यात्री भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मुख्यालय द्वारा तय समयसीमा के अनुसार प्रशिक्षण और तैयारियां जारी रखे हुए हैं।

बेंगलुरु स्पेस एक्सपो 2026 के नौवें संस्करण के मौके पर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘जब आप अंतरिक्ष यात्री बनते हैं तो आपको इस तथ्य के साथ जीना सीखना होता है कि खासकर शुरुआती कार्यक्रमों में देरी होगी। हम यह सोचकर अंतरिक्ष यात्री नहीं बने थे कि सब कुछ पहले से तय होगा,यान तैयार है, रॉकेट तैयार है और आप आएं वह यह तारीख है।’’

भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान के पायलट रहे प्रताप ने कहा कि जब अमेरिका या रूस के अंतरिक्ष यात्री किसी कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो वे एक निश्चित अवधि में उड़ान की उम्मीद के साथ जुड़ते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हमारे मामले में हम एक ‘प्रोटोटाइप’ (शुरुआती) कार्यक्रम से जुड़े थे। हमारा उद्देश्य सिर्फ उड़ान भरना नहीं था, बल्कि इसमें अपना छोटा-सा योगदान देकर उस कार्यक्रम को तैयार करने में मदद करना भी था। हम लगातार यह योगदान दे रहे हैं।’’

मिशन में देरी से जुड़े सवाल पर प्रताप ने कहा कि गगनयान केवल उड़ान भरने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जमीन पर भी काफी काम पूरा किया जाना है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कुछ महीने या एक-दो साल की देरी हो सकती है। लेकिन जब यह होगा तो इसकी सफलता सकारात्मक होनी चाहिए। इसलिए हम सभी को इस देरी को थोड़े धैर्य के साथ स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि यह शुरुआत है। आप शुरुआत में ही असफल नहीं होना चाहते। ऐसा होने पर कार्यक्रम रुक भी सकता है, और हम ऐसा नहीं चाहते।’’

उन्होंने कहा कि देश के कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोग इस मिशन पर काम कर रहे हैं और लोगों को उन पर भरोसा रखना चाहिए।

प्रताप ने कहा, ‘‘धैर्य रखें। इसे अपनी गति से आगे बढ़ने दें।’’

मिशन में अपनी भूमिका के बारे में उन्होंने बताया कि वह मानव-मशीन इंटरफेस की शुरुआती संरचना (फ्रंट-एंड आर्किटेक्चर) के डिजाइन से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए मुझे संचालन प्रक्रिया, विमानन संबंधी अपने ज्ञान और अन्य चीजों का इस्तेमाल करना होता है। मैं डिजाइनरों के साथ बैठता हूं और उन्हें बताता हूं कि क्या और कैसे डिजाइन किया जाना चाहिए। इस तरह मैं संचालन संबंधी जरूरतों पर काम करता हूं।’’

इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने ईओएस-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद अपने संबोधन में कहा था कि इस साल मानव रहित मिशन के प्रक्षेपण की दिशा में काम ‘‘बहुत तेजी और व्यवस्थित तरीके से’’ जारी है।

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसे अभी विकसित किया जा रहा है। इसके तहत तीन सदस्यीय दल को तीन दिन के मिशन पर अंतरिक्ष में भेजने और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की योजना है।

नारायणन ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा था, ‘‘गगनयान कार्यक्रम 2027 में प्रस्तावित है। इससे पहले तीन मानव रहित मिशनों की योजना है। हम पहले मानव रहित मिशन की दिशा में काम कर रहे हैं।’’

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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