स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के जबड़े के इशारे पर दी प्रतिक्रिया, ‘मीसा’ के समय की पीड़ा याद की

स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के जबड़े के इशारे पर दी प्रतिक्रिया, ‘मीसा’ के समय की पीड़ा याद की

स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के जबड़े के इशारे पर दी प्रतिक्रिया, ‘मीसा’ के समय की पीड़ा याद की
Modified Date: September 10, 2026 / 11:18 am IST
Published Date: September 10, 2026 11:18 am IST

चेन्नई, 10 सितंबर (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में कड़े कानून ‘मीसा’ से जुड़ी टिप्पणियों के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा किए गए ‘‘जबड़े के इशारे’’ पर बृहस्पतिवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और आपातकाल के दौरान जेल में अपने साथ हुई गंभीर शारीरिक ज्यादती को याद किया।

विजय द्वारा सरकरिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दशकों पुराने भ्रष्टाचार के आरोप उठाए जाने पर स्टालिन ने उनकी आलोचना की और इन आरोपों को ‘‘राजनीति से प्रेरित झूठ’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप उन लोगों द्वारा फैलाए गए, जो पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के प्रति लंबे समय से नाराजगी रखते थे।

मीसा (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) के दौर के अपने इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में स्वीकार किया कि मीसा के इतिहास को लेकर विजय की बात सही थी। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुए दमन का जिक्र करते हुए बताया कि 31 जनवरी 1976 को करुणानिधि द्वारा मीसा कानून का विरोध किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

स्टालिन ने जेल में अपने साथ हुए कठोर व्यवहार का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उनके सहयोगी चिट्टी बाबू की मौत हो गई और उन्हें खुद भी चोटें आईं।

स्टालिन ने वीडियो में कहा, ‘‘मुझे एहसास है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान हुई कुछ घटनाओं से तमिल लोगों और हमारे भाइयों में गुस्सा और असंतोष पैदा हुआ है। चूंकि मेरा जेल का इतिहास इस विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए मैं इसे स्पष्ट करना चाहता हूं। विजय भाई, आपने जो कहा वह सच है, यह झूठ नहीं है। आपातकाल के दौरान हमारे नेता कलैग्नार (करुणानिधि) ने इसके विरोध में मरीना बीच पर एक विशाल सभा की थी और मीसा की कड़ी आलोचना की थी।’’

इसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने 31 जनवरी 1976 को द्रमुक सरकार को बर्खास्त कर दिया। इसके तुरंत बाद पुलिस मीसा के तहत उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके गोपालपुरम स्थित आवास पर पहुंच गई।

स्टालिन ने कहा, ‘‘उस दिन मैं घर पर नहीं था, क्योंकि मैं प्रचार अभियान के लिए गया हुआ था। हमारे नेता ने पुलिस से कहा, ‘मेरा बेटा प्रचार के लिए गया है। वह कल लौट आएगा। उसके आने के बाद मैं खुद आपको बुलाऊंगा, आप आकर उसे गिरफ्तार कर लेना।’ अगले दिन जब मैं लौटा तो उन्होंने खुद पुलिस को बुलाकर मुझे गिरफ्तार करने के लिए कहा था।’’

भाषा गोला शोभना मनीषा

मनीषा


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