तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी प्रधानमंत्री के समर्थन से किया जा रहा ‘पर्यावरण विनाश’ है: कांग्रेस

तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी प्रधानमंत्री के समर्थन से किया जा रहा 'पर्यावरण विनाश' है: कांग्रेस

तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी प्रधानमंत्री के समर्थन से किया जा रहा ‘पर्यावरण विनाश’ है: कांग्रेस
Modified Date: September 10, 2026 / 10:46 am IST
Published Date: September 10, 2026 10:46 am IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से समृद्ध हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पूर्ण समर्थन’’ से किया जा रहा ‘‘एक और पर्यावरण विनाश’’ है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में दावा किया कि तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी में विजेता को लेकर कोई रहस्य नहीं है।

उनका कहना है, ‘नीलामी में विजेता कंपनी सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड है, जो मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी कंपनी है। मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड, अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है।’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस फैसले को हसदेव-अरण्य से जुड़े घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 26 जुलाई, 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर हसदेव-अरण्य में कोयला ब्लॉकों के किसी भी नए आवंटन या नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी।

रमेश ने कहा कि 16 जुलाई, 2023 को राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट रूप से कहा था कि हसदेव-अरण्य में किसी नई खदान को आवंटित करने या विकसित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि 19 अक्टूबर, 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने नीलामी प्रक्रिया से 40 कोयला ब्लॉकों को बाहर कर दिया था, जिनमें तारा भी शामिल था।

रमेश के मुताबिक, स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदाय पिछले 15 वर्षों से ग्राम सभा के प्रस्तावों, जन अभियानों, धरनों और विरोध मार्चों के जरिए अपने जंगलों और उनसे मिलने वाली आजीविका की रक्षा की मांग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन समुदायों ने रायपुर तक विरोध मार्च भी निकाले हैं।

उन्होंने दावा किया कि तारा कोयला ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें 4,000 एकड़ से अधिक घना वन क्षेत्र है और खनन के लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करनी पड़ेगी।

रमेश ने कहा, ‘‘इतने बड़े प्राकृतिक वन क्षेत्र के अंधाधुंध विनाश की भरपाई किसी भी तरह के प्रतिपूरक वनीकरण से नहीं हो सकती। प्रतिपूरक वनीकरण का विचार ही शुरू से एक छलावा है।’’

उन्होंने कहा कि तारा में खनन लेमरू हाथी रिजर्व के चारों ओर होगा, जिससे भारत के राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी के आवागमन गलियारे पर गंभीर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि हाथियों की संख्या में कमी का संकट पहले ही गंभीर रूप ले चुका है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि तारा ब्लॉक में खनन ‘प्रधानमंत्री के पूर्ण समर्थन से किए जा रहे पर्यावरण विनाश का एक और उदाहरण है।’’

रमेश ने दावा किया कि खनन से कई अन्य प्रजातियां भी खतरे में पड़ेंगी, जिनमें कुछ पहले से ही गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं।

हक वैभव

वैभव


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