उच्च न्यायालय ने गोवा की कोलवाले जेल के भीतर ‘मोबाइल चार्जिंग पॉइंट’ बनाये जाने पर हैरानी जताई

उच्च न्यायालय ने गोवा की कोलवाले जेल के भीतर ‘मोबाइल चार्जिंग पॉइंट’ बनाये जाने पर हैरानी जताई

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  • Publish Date - January 9, 2026 / 02:25 PM IST,
    Updated On - January 9, 2026 / 02:25 PM IST

पणजी, नौ जनवरी (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने कहा है कि यह बात ‘‘अंतरात्मा को झकझोर देने वाली’’ है कि उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित केंद्रीय जेल के भीतर जेल अधिकारियों की जानकारी और सहमति के बिना ‘मोबाइल चार्जिंग पॉइंट’ बनाये गये थे।

न्यायमूर्ति श्रीराम वी. शिरसाट ने हाल में एक आदेश में जेल परिसर में मोबाइल फोन और प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का संज्ञान लिया और जेल अधिकारियों को एक मजबूत जैमर नेटवर्क स्थापित करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने चंदू पाटिल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए, जो एक बच्चे की हत्या के आरोप में जेल में है। आरोप है कि पाटिल ने जेल से पीड़ित परिवार को फोन करके अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी थी।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ त्वरित और व्यापक कड़े उपाय करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।’’

आदेश में जेल प्रशासन से 20 जनवरी, 2026 को जवाब मांगा गया है।

आदेश में कहा गया है, ‘‘यह बात स्पष्ट है कि ‘चार्जिंग पॉइंट’ वहां थे, वे क्यों लगाये गये हैं।’’

अदालत ने कहा कि उसके पास ऐसे ही कई मामले आये हैं जिनमें मादक पदार्थों के अलावा मोबाइल फोन भी जेल परिसर में तस्करी करके लाये गये थे। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के अंदर पहले भी मोबाइल फोन मिलने के बावजूद, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘केवल एक कैदी के खिलाफ मोबाइल या प्रतिबंधित सामान रखने के आरोप में कार्रवाई करना कोई निर्णायक समाधान नहीं होगा, बल्कि मामले की तह तक जाना आवश्यक है।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस धारणा पर आगे बढ़ रहा है कि जेल में ‘सिग्नल जैमिंग सिस्टम’ स्थापित नहीं हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें।

अदालत ने कहा कि वह इस बात को समझने में असमर्थ है कि मोबाइल फोन इतनी आसानी से अंदर कैसे ले जाए जा सकते हैं, खासकर तब जब जेल अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं।

न्यायाधीश ने पूछा, ‘‘क्या यह निरीक्षण सतही और दिखावा है या प्रवेश द्वार पर जानबूझकर ढिलाई बरती जाती है ताकि मोबाइल फोन बिना किसी रुकावट के जेल परिसर के अंदर पहुंच सकें?’’

अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की घटनाएं नियमित अंतराल पर हो रही हैं, इसलिए कुछ जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसने कहा, ‘‘कुछ कड़े कदम उठाना समय की मांग है।’’

चंदू पाटिल का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस से काम नहीं चलेगा। न्यायालय ने कहा कि संबंधित तिथि और समय के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर), सीसीटीवी फुटेज और ‘सेल टावर लोकेशन’ का पता लगाना जरूरी है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तरह की गतिविधियों के लिए मामूली सजा से जेल के कैदियों का हौसला बढ़ता है…।’’

उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल के उप अधीक्षक या अधीक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि तत्काल मजबूत फोन जैमर या सेलुलर निरीक्षण प्रणाली स्थापित की जाये और इनका संचालन सख्ती से जेल परिसर तक ही सीमित रखा जाए ताकि आसपास के निवासियों पर इसका कोई प्रभाव न पड़े।

इसने यह भी निर्देश दिया कि जांच बिंदुओं पर निरीक्षण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए अतिरिक्त नियम बनाये जाएं।

भाषा

देवेंद्र मनीषा

मनीषा