सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने में देरी कर रही : कॉजपा

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सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने में देरी कर रही : कॉजपा

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:02 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:02 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने के अपने आश्वासन पर अमल करने में देरी करने का आरोप लगाया।

कॉजपा ने मांग की कि पुलिस की बर्बर कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित उच्चाधिकार प्राप्त समिति में उसके सदस्यों को भी शामिल किया जाए।

उच्चतम न्यायालय परिसर के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर और उसके आसपास प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सरकार से तीन बार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की सूची मांगी। उन्होंने सरकार से उन मामलों की सूची न्यायालय को सौंपने की मांग की, जिन्हें रद्द किया जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉजपा के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बर्बर कार्रवाई करने के आरोप लगाए गए हैं। न्यायालय में आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोप वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई।

दास ने बताया कि याचिकाकर्ता छात्रों ने अपनी वकील वृंदा ग्रोवर के माध्यम से शीर्ष अदालत से अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल करते हुए देशभर में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का आग्रह किया।

दास के मुताबिक, ग्रोवर ने न्यायालय से कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे कदम पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह समेत केंद्र के प्रतिनिधियों ने 25 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की मांगों को मान लिया था, जिसके बाद आंदोलन खत्म कर दिया गया था।

दास ने कहा, “सरकार ने आज उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह प्रतिबद्धता नहीं जताई कि वह प्राथमिकी की सूची उपलब्ध कराएगी। उच्चतम न्यायालय ने आज सरकार से तीन बार कहा कि आपको यह सूची देनी चाहिए, तभी हम प्राथमिकी रद्द करेंगे।”

उन्होंने दावा किया कि सरकार ने (कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक की घटना के चलते आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजन को) मुआवजे के संबंध में दिए गए अपने आश्वासन को भी पूरा नहीं किया है और कॉजपा के प्रतिनिधियों के साथ आगे की बैठकें भी नहीं की हैं।

कॉजपा प्रवक्ता ने कहा, “अगर आपने कोई प्रतिबद्धता जताई है, तो आपको उसका सम्मान करना होगा। आपने मुआवजे और प्राथमिकियों के संबंध में जो भी वादे किए थे, उन्हें आप पूरा नहीं कर रहे हैं। आपने पूरे देश के साथ धोखा किया है।”

उन्होंने कहा कि अगर सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए कदम नहीं उठाती है, तो कॉजपा की राष्ट्रीय कार्य समिति बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगी।

दास ने कहा, “अगर देश के युवाओं को फिर से सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया गया, तो इस बार यह सरकार के लिए ठीक नहीं होगा।”

कॉजपा के कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि संगठन और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पिछली बैठक दो अगस्त को हुई थी, जिसके बाद वकीलों से राय-मशविरा के आधार पर तैयार एक मसौदा साझा किया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक और बैठक के अनुरोध पर सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

सिंह ने कहा, “उन्होंने (केंद्र सरकार) इस बात पर भी सहमति जताई थी कि वे अनुच्छेद-142 लागू करने के संबंध में अदालत में अपना रुख रखेंगे। लेकिन आज उन्होंने ऐसा कोई रुख नहीं रखा।”

उन्होंने कहा कि सरकार के साथ तैयार किया गया मसौदा अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए।

दास ने कहा कि सरकार ने लगभग 2,800 “आदतन अपराधियों” की पहचान की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उनसे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से अलग तरह से निपटा जाना चाहिए।

दास ने कहा, “अगर आप उनके (आदतन अपराधियों) खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं, तो यह बिल्कुल अलग मुद्दा है। लेकिन छात्रों का मुद्दा, प्रदर्शनकारियों का मुद्दा, प्राथमिकी से संबंधित है।”

प्रस्तावित उच्चाधिकार प्राप्त समिति के बारे में सिंह ने कहा कि कॉजपा चाहेगी कि इसमें उसके सदस्य शामिल किए जाएं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समिति में स्वतंत्र सदस्य शामिल किए जाने चाहिए।

सिंह ने कहा, “हमें भरोसा है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति समाधान जरूर तलाश लेगी, बशर्ते वह स्वतंत्र हो। लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि कॉजपा के सदस्यों को इसका हिस्सा बनाया जाए।”

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की बर्बर कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित करेगी, जिसमें शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक पूर्व निदेशक शामिल होंगे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों के बारे में अलग-अलग पक्षों से सुझाव मिलने के बाद बुधवार को उसके गठन का आदेश जारी किया जाएगा।

दास ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान चेहरे का मिलान करने वाली प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो लिए गए तथा सीसीटीवी कैमरों के जरिये उन पर नजर रखी गई।

दास ने कहा, “चेहरे का मिलान करने वाली प्रौद्योगिकी के बारे में कई संवैधानिक सवाल हैं। इसका बहुत गलत इस्तेमाल हो सकता है। मुझे लगता है कि सुरक्षा के उपाय किए जाने चाहिए।”

उन्होंने शीर्ष अदालत से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया कि क्या इस तरह की निगरानी संवैधानिक है।

आम आदमी पार्टी (आप) से जुड़े राजनीतिक आरोपों के बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा कि कॉजपा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में नहीं उलझना चाहती। उन्होंने सरकार से छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने को कहा।

दास ने आरोप लगाया कि “शहरी नक्सली” और “दिमागी नक्सली” जैसे ठप्पे युवाओं को बदनाम करने के मकसद से गढ़े गए हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कॉजपा पर ‘आप’ की शह पर काम करने का आरोप लगाया है।

दास ने बताया कि कॉजपा ने देशभर में “स्कूल ठीक करो” अभियान शुरू किया है, जिसके तहत युवा स्कूलों में बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं का दस्तावेजीकरण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि संगठन के सदस्य देशव्यापी दौरा शुरू करने जा रहे हैं और वे सरकार की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की रणनीति तय करेंगे।

कॉजपा प्रवक्ता ने कहा, “सभी मांगें पूरी की जानी चाहिए।”

दास ने प्रश्नपत्र लीक के कारण कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिजन को मुआवजा देने के मामले में सरकार की इच्छाशक्ति पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, “देश के युवा इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। मैं आपको फिर से चेतावनी दे रहा हूं। कृपया अपना रवैया सुधारें। वरना, हमें फिर से कोई कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”

दास ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान कॉजपा ने दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग किया था।

दास ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई की घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया गया और उनका यौन उत्पीड़न किया गया। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही के बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा, “यहां स्वागत करने जैसा कुछ नहीं हुआ है। जब कुछ ठोस होगा, तब हम उसका स्वागत करेंगे।”

भाषा पारुल वैभव

वैभव