नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को कांग्रेस सदस्य राजीव शुक्ला ने युद्ध के बदलते स्वरूप का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को अब नयी रणनीति बनानी होगी तथा उसे ड्रोन और मिसाइल को ध्यान में रखते हुए नीति बनानी होगी।
शुक्ला अनुदान की अनुपूरक मांगों पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग ले रहे थे। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के तहत होने वाला ज्यादातर खर्च थलसेना पर होता है, लेकिन अब स्थिति बदल गयी है और युद्ध आसमान में हो रहे हैं।
उन्होंने ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ और पश्चिम एशिया युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को नयी रणनीति बनानी होगी और ड्रोन एवं मिसाइल को ध्यान में रखते हुए अलग नीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में शोध एवं अनुसंधान पर खर्च बढ़ाना होगा तथा ड्रोन रोधी प्रौद्योगिकी विकसित करनी होगी।
देश में रसोई गैस संकट का जिक्र करते हुए कांग्रेस सदस्य ने कहा कि अंततः सत्ता पक्ष ने स्वीकार कर लिया है कि देश में संकट है, लेकिन वह इसके लिए भी विपक्ष पर ही दोषारोपण करने में लगा है। उन्होंने कहा कि ईरान से भारत के संबंध हमेशा अच्छे थे, लेकिन इस सरकार ने विदेश नीति ही बदल दी।
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा गुटनिरपेक्ष आंदोलन का सदस्य रहा, लेकिन इस सरकार ने उसे भी छोड़ दिया।
उन्होंने ‘आयुष्मान भारत योजना’ और ‘फसल बीमा योजना’ का जिक्र करते हुए दावा किया कि इन दोनों योजनाओं में काफी अनियमितताएं हैं और बड़ा घपला हो रहा है। उन्होंने सरकार से दोनों योजनाओं में सुधार करने की मांग की।
चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार विभिन्न मंत्रालय ने खर्च नहीं किया और काफी राशि बच गयी। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात नहीं है, बल्कि सरकार की नाकामी को दर्शाता है।
तृणमूल सदस्य ने कहा कि विभिन्न मंत्रालयों द्वारा खर्च नहीं किए जाने का मतलब है कि जरूरी काम नहीं हुआ और जिस कार्य के लिए पैसे आवंटित किए गए थे, वे पूरे नहीं हो सके।
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा नेता काफी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र को विभिन्न मदों में पश्चिम बंगाल की बकाया राशि जल्द जारी करनी चाहिए।
गोखले ने केंद्र पर चुनावी प्रदेश पश्चिम बंगाल को देय दो लाख करोड़ रुपये की राशि रोक कर रखने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी, जिसे सभी विपक्षी दल संसद में ला रहे हैं।
चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण देश में एलपीजी संकट पैदा हो गया है, जिससे यह ‘खुलासा’ होता है कि सरकार के पास ‘कोई ऊर्जा सुरक्षा नीति नहीं है’।
द्रमुक की कनिमोझी एनवीएन सोमू ने आरोप लगाया कि 2014 से 2026 तक नरेन्द्र मोदी सरकार का 12 वर्ष स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक काला युग है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण ईंधन आपूर्ति प्रभावित होने से भारत तेल और एलपीजी संकट का सामना कर रहा है।
शिवसेना (उबाठा) सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “कल ही हमने विभिन्न राज्यों में राज्यसभा चुनाव होते देखा। शायद अब इन कोषों का इस्तेमाल मतों को खरीदने के लिए किया जाएगा।
बसपा के रामजी ने सरकार का ध्यान शिक्षा के लिए आवंटित व्यय का जिक्र किया और कहा कि नयी शिक्षा नीति में इसे बढ़ाकर जीडीपी का 6 प्रतिशत करने की सिफारिश की गई है। उन्होंने देश भर में शिक्षकों की कमी और स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की समस्या भी उठाई।
भाषा अविनाश दिलीप
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