नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि नक्सलियों के सफाये का दावा करने के बाद उसने इस विधेयक के माध्यम से केंद्रीय बलों के भविष्य की संभावनाओं का सफाया कर दिया है।
लोकसभा में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने यह भी कहा कि सीआरपीएफ और दूसरे अन्य केंद्रीय बलों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसी सदन में गृह मंत्री ने (बीते सोमवार को) कहा था कि हमने नक्लियों का सफाया कर दिया है…अब आपने हमारे सीएपीएफ की भविष्य की संभावनाओं का सफाया कर दिया।’’
हरियाणा के रोहतक से लोकसभा सदस्य का कहना था, ‘‘आज हनुमान जयंती है। कहा जाता है-जय बजरंग बली, तोड़ दुश्मन की नली। जिन्होंने (सीएपीएफ जवानों) दुश्मनों की नली तोड़ी, आपने (सरकार) उनके भविष्य की नली तोड़ दी।’’
हुड्डा ने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र बलों को पुरानी पेंशन की सुविधा मिलनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद विष्णु दयाल राम ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और कैडर प्रबंधन को बेहतर बनाएगा।
उन्होंने कहा कि यह कहना उचित नहीं है कि यह विधेयक एक सेवा के पक्ष में और दूसरी के विरोध में है।
भाजपा सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सरकार ने निरंतर प्रयास किए हैं और यह प्रयास भी इसी से जुड़ा है।
तेलुगू देसम पार्टी के सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा कि केंद्र सरकार को केंद्रीय बलों में रिक्तियों को भरना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का वादा किया था, जिसे दोनों नेताओं ने पूरा किया।
तेन्नेटी का कहना था, ‘‘यह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय देशमुख ने कहा कि प्रतिनियुक्ति के माध्यम से दूसरे अधिकारी को सीएपीएफ में लाना, इन सशस्त्र बलों के अधिकारियों के साथ अन्याय है।
उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय के आदेश और संवैधानिक भावना के अनुकूल नहीं है।
देशमुख का कहना था कि विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजा जाए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के सांसद मोहिते पाटिल ने दावा किया कि इस विधेयक के माध्यम से उच्चतम न्यायालय के आदेश की अहवेलना की गई है।
निर्दलीय सदस्य उमेश भाई पटेल ने विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने का आग्रह किया।
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