Vande Bharat/Image Credit: IBC24.in
Vande Bharat: नई दिल्ली: शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान की सुबह इजराइली मिसाइलों और अमेरिकी गाइडेड बमों के धमाके और विध्वंस से हुई। इजराइल ने इसे ‘ऑपरेशन लियोन्स रोर’ कहा है, लेकिन दुनिया इसे मिडिल ईस्ट के अंत की शुरुआत मान रही है।
दोनों देशों के युद्ध को लेकर न्यूज एजेंसी के मुताबिक इस वक्त सबसे बड़ी खबर ये है कि, इजरायल के हमलों में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नसीर-जा-देह और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पकपूर की (Vande Bharat) मौत हो गई है। हालांकि ईरान की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इजराइल का हमला सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं था। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजराइल ने ईरान के सत्ता के केंद्र को निशाना बनाया है। रक्षा मंत्रालय, खुफिया विभाग और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांड सेंटर पर सीधे प्रहार किए गए। सबसे चौंकाने वाली खबर आई सुप्रीम लीडर के कार्यालय से रिपोर्ट है कि, खामेनेई के घर के पास जोरदार धमाके हुए, जिसके तुरंत बाद उन्हें एक ‘अंडरग्राउंड टनल नेटवर्क’ के जरिए किसी सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर ले जाया गया। इजराइल का मकसद साफ है-ईरान की निर्णय लेने की क्षमता को पंगु बनाना ये इजराइल की ताकत और अमेरिकी सैटेलाइट गाइडेंस का एक घातक कॉकटेल था।
Vande Bharat: “ईरान का जवाब ‘शॉक और विस्मय’ वाला था। ईरान ने अपनी ‘रेड लाइन’ को पार होते देख, अपने तरकश से वो तीर निकाले जो उसने दशकों से छिपाकर रखे थे। ईरान ने करीब 400 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इनमें ‘खैबर-शेकन’ और ‘फत्ताह’ जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल थीं। ये मिसाइलें सिर्फ इजराइल के सैन्य ठिकानों पर ही नहीं गिरीं, बल्कि ईरान ने उन देशों को भी सबक सिखाने की (Vande Bharat) कोशिश की जिन्होंने अपनी जमीन पर अमेरिकी बेस को पनाह दी है। कतर का अल-उदैद, बहरीन का फिफ्थ फ्लीट और अबू धाबी का अल-धाफरा बेस। आज ये ठिकाने आग की लपटों में घिरे दिखे। अबू धाबी में हुए दो बड़े विस्फोटों ने साबित कर दिया कि यह युद्ध अब किसी एक देश की सीमा में नहीं रहने वाला।
इस पूरे हमले के पीछे वाशिंगटन की बड़ी सोच है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को ‘सेल्फ डिफेंस’ का नाम दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी बैलिस्टिक मिसाइलों और परमाणु कार्यक्रम की है..ईरान का कहना है कि, जून 2025 में जब उसकी परमाणु साइटों पर इजराइल ने हमला किया था, तब उसकी मिसाइलों ने ही उसे बचाया था। इसलिए ईरान मिसाइल कार्यक्रम को ‘अस्तित्व की लड़ाई’ मानता है। (Vande Bharat) उधर, ट्रंप प्रशासन का मानना है कि.. जब तक ईरान के पास मिसाइलें हैं, अमेरिकी सैनिक और उसके सहयोगी कभी सुरक्षित नहीं रह सकते। ट्रंप ने इसे ‘परमानेंट सॉल्यूशन’ करार दिया है..यानी ईरान की सैन्य कमर को पूरी तरह तोड़ देना।
Vande Bharat: जंग की बड़ी-बड़ी बातों के बीच इंसानी दर्द की आवाज़ें दब जाती हैं। ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की स्थिति सबसे नाजुक है। कई छात्रों के पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए सरकारी दफ्तरों में फंसे हैं और अब वहां बमबारी हो रही है। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने पीएमओ से गुहार लगाई है कि जैसे यूक्रेन से ‘ऑपरेशन गंगा’ चलाया गया था, वैसे ही ईरान से भारतीयों को निकालने के लिए तत्काल वायुसेना के विमान भेजे जाएं। तुर्किए ने अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दी हैं, समुद्री रास्ते बंद हो रहे हैं और रियाद जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में भी धमाके सुनाई दे रहे हैं। इधऱ, भारत में खामेनेई के समर्थन में नारे भी लगे..रैली निकाली गई।
शनिवार की ये सुबह मिडिल ईस्ट के लिए एक अंतहीन रात की तरह शुरू हुई है। 400 मिसाइलें, 6 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले और इजराइल की ‘शेर जैसी दहाड़’, ये सब इशारा कर रहे हैं कि हम एक ऐसी आग के बीच खड़े हैं जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को जला सकती है। तेल की कीमतें अगले 24 घंटों में रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं। अब सवाल ये (Vande Bharat) नहीं है कि आगे क्या होगा, सवाल ये है कि, क्या अब इसे रोकने वाला कोई बचा है? तेहरान की गलियों से लेकर वाशिंगटन के ओवल ऑफिस तक, हर कोई अपनी अगली चाल चल चुका है।
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