अहमदाबाद, पांच अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने बुधवार को गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) के कामकाज की जांच की मांग की और आरोप लगाया कि उच्चतम न्यायालय की हालिया टिप्पणियों से राज्य संचालित इस एजेंसी में व्याप्त भ्रष्टाचार उजागर हुआ है।
गोहिल ने यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोहिल ने उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें न्यायालय ने वलसाड जिले के सरीगाम औद्योगिक क्षेत्र में 20 औद्योगिक भूखंडों को कृषि भूमि से बदलने के मामले में गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा था।
गोहिल ने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों ने जीआईडीसी के अधिकारी के फैसले को ‘दुर्भावनापूर्ण’ बताया था और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर टिप्पणियां की थीं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस मामले से यह सामने आया कि जीआईडीसी की नीति का उल्लंघन करते हुए करोड़ों रुपये मूल्य की औद्योगिक जमीन को बहुत कम मूल्य वाली कृषि भूमि से बदला गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अधिकारियों ने जमीन के लेन-देन से फायदा उठाने वाले व्यक्ति को 30 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने की कोशिश की; इसके लिए उन्होंने जमीन अधिग्रहण से जुड़े अलग-अलग कानूनों के तहत रकम की गलत गणना की।
गोहिल के अनुसार, उच्चतम न्यायालय ने इस गणना को खारिज करते हुए कहा कि देय मुआवजा केवल 1.17 करोड़ रुपये होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के फैसलों से पता चलता है कि जीआईडीसी में किस तरह का भ्रष्टाचार है।’
कांग्रेस नेता ने जीआईडीसी में कथित भ्रष्टाचार, बार-बार बदली जा रही नीतियों और भूमि आवंटन प्रक्रिया की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप