गुजरात उच्च न्यायालय ने आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार को अंतरिम राहत देने से इनकार किया

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गुजरात उच्च न्यायालय ने आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार को अंतरिम राहत देने से इनकार किया

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 09:52 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 09:52 PM IST

अहमदाबाद, 23 सितंबर (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने पत्रकार रवि नायर की उस याचिका में अंतरिम राहत देने से बुधवार को इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अदाणी एंटरप्राइजेज की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति एम. के. ठक्कर की एकल पीठ ने आदेश में कहा कि कोई अंतरिम राहत दिए जाने की आवश्यकता नहीं है और मामले को आदेश लिखे जाने के लिए अगले बुधवार (30 सितंबर) के लिए सूचीबद्ध किया।

नायर ने याचिका में मानहानि मामले में सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने के कारण सत्र अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है।

उच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि नायर गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को चुनौती नहीं दे सकते, क्योंकि उसे पहले ही तामील किया जा चुका है।

अदालत ने कहा कि उनके पास एकमात्र उपाय अपीलीय अदालत के उस आदेश को रद्द कराने के लिए उचित आवेदन दाखिल करना है।

इसने नायर के वकील से यह भी सवाल किया कि उन्होंने यह जानकारी क्यों नहीं दी कि उन्होंने उच्च न्यायालय में एनबीडब्ल्यू पर रोक लगाने की याचिका के साथ-साथ सत्र अदालत में इस मामले में जमानत के लिए भी आवेदन दाखिल किया है।

नायर के वकील अभिक चिमनी ने अपनी दलील में कहा कि पूरी सुनवाई के दौरान इस स्थिति को छोड़कर किसी भी समय जमानती वारंट जारी नहीं किया गया और न ही वह समन मिलने के बाद पेश होने में विफल रहे।

उन्होंने कहा कि अपील में आठ सुनवाई हुईं, जिनमें से वह चार में पेश हुए, जैसा कि अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज है।

अदाणी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मितेश अमीन ने अदालत के समक्ष बताया कि नायर ने उसी मामले में जमानत के लिए गांधीनगर की अदालत का एक साथ रुख करने की जानकारी छिपाई थी।

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें हिरासत में भेजने वाला आदेश कम से कम एक अक्टूबर तक प्रभावी रखा जाए, जिस दिन उन्हें सत्र अदालत के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है।

नायर को 17 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले गांधीनगर की एक जिला अदालत ने आपराधिक मानहानि मामले में नायर की दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील की सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

इस साल 10 फरवरी को गांधीनगर की मानसा अदालत ने अदाणी एंटरप्राइजेज की ओर से तीन सितंबर, 2021 को दायर एक आपराधिक मानहानि मामले में नायर को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला उनके नाम से जुड़े कुछ ट्वीट और लेखों को लेकर दायर किया गया था।

उनके वकील ने कहा कि नायर ने अपनी दोषसिद्धि को गांधीनगर की अपीलीय अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने इस साल नौ मार्च को उन्हें इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह अपनी अपील की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे।

नायर के वकीलों ने कहा कि पत्रकार तीन सितंबर, 2026 को हुई सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, क्योंकि उनकी तबीयत खराब थी और उन्हें अपने गृह राज्य केरलम से यात्रा करनी पड़ती है।

उनके वकीलों के अनुसार, अपीलीय अदालत ने व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की उनकी अर्जी खारिज कर दी और बिना किसी पूर्व नोटिस के उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया।

अदालत ने नायर को हिरासत में लेने का निर्देश दिया, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश