हरिवंश के राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुने जाने की संभावना

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हरिवंश के राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुने जाने की संभावना

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  • Publish Date - April 16, 2026 / 06:30 PM IST,
    Updated On - April 16, 2026 / 06:30 PM IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) मनोनीत सदस्य हरिवंश के राज्यसभा का उपसभापति निर्विरोध चुने जाने की संभावना है क्योंकि उनके पक्ष में पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए वहीं विपक्ष ने अपने उम्मीदवार के संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

उपसभापति पद के लिए चुनाव शुक्रवार को सुबह 11 बजे होगा।

हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद राज्यसभा के उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को चुनाव कराने की तारीख तय की है।

चुनाव प्रस्तावों के नोटिस देने की अंतिम तिथि और समय बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे था।

सूत्रों के अनुसार, हरिवंश के पक्ष में पांच प्रस्ताव प्राप्त हुए जबकि विपक्ष की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला।

विपक्ष ने मोदी सरकार द्वारा सात वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं करने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

सदन के नेता जेपी नड्डा ने पहला प्रस्ताव पेश किया, जिसका समर्थन एस फांग्नोन कोन्यक ने किया। दूसरा प्रस्ताव भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पेश किया और भाजपा सांसद बृजलाल ने इसका समर्थन किया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी एक प्रस्ताव पेश किया, जिसका भाजपा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर और जद (यू) सांसद संजय कुमार झा ने समर्थन किया।

एक अन्य प्रस्ताव रालोद सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने पेश किया, जिसका शिवसेना सांसद मिलिंद देवरा ने समर्थन किया।

सूत्रों ने बताया कि निर्धारित समय तक विपक्ष की ओर से कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उपसभापति पद के लिए चुनाव निर्विरोध होने की संभावना है।

पूरी संभावना है कि नड्डा द्वारा प्रस्तुत और कोन्यक के समर्थन वाले पहले प्रस्ताव को सदन ध्वनि मत से पारित कर दे।

सूत्रों ने बताया कि सभापति राधाकृष्णन उपसभापति पद के लिए हरिवंश के निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा करेंगे।

उन्होंने बताया कि इसके बाद सदन के नेता और विपक्ष के नेता स्थापित परंपरा के अनुसार उन्हें आसन तक ले जाएंगे। हरिवंश दो बार सदन के उपसभापति रह चुके हैं और यदि निर्वाचित होते हैं, तो यह उनका तीसरा कार्यकाल होगा।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने इस मामले पर कोई सार्थक परामर्श भी नहीं किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि “हरिवंश 3.0” विपक्ष के सुझावों के प्रति अधिक संवेदनशील होगा।

‘‘हरिवंश 3.0’’ से तात्पर्य हरिवंश के तीसरे कार्यकाल से है। रमेश ने विपक्ष के विरोध के कारण बताते हुए कहा, “पहला, मोदी सरकार ने सात वर्षों से लोकसभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है, जो पहले कभी नहीं हुआ।

उन्होंने कहा ‘‘दूसरा, राज्यसभा में उपाध्यक्ष के समकक्ष उपसभापति होता है। हरिवंश का दूसरा कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त हुआ। इसके एक दिन बाद उन्हें राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया और अब वह तीसरे कार्यकाल के लिए राजग के उम्मीदवार हैं।”

रमेश ने कहा कि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि राष्ट्रपति द्वारा नामित किसी व्यक्ति को राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए विचार किया गया हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के मन में हरिवंश के प्रति किसी भी तरह का अनादर नहीं है।

हरिवंश का कार्यकाल नौ अप्रैल को समाप्त होने के बाद उपसभापति का पद रिक्त हो गया था। इसके बाद उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया और उन्होंने 10 अप्रैल को शपथ ली।

भाषा अविनाश माधव

माधव