चंडीगढ़, एक जून (भाषा) पुलिस हिरासत में अपने पति के साथ यातना, अपमान और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली एक महिला की शिकायत का हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है।
एचएचआरसी ने 25 मई के अपने आदेश में गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को थाने परिसर से सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और अगली सुनवाई की तारीख से पहले इसे पेश करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा, हरियाणा भर में पुलिस प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी निगरानी से संबंधित उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन के आकलन के लिए व्यापक निर्देश भी जारी किए गए।
खुशी शर्मा द्वारा एचएचआरसी के समक्ष दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके पति राकेश शर्मा को 20 सितंबर, 2024 को सिविल लाइंस पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में मई 2026 में हिरासत में लिया गया था।
शिकायत के अनुसार, यद्यपि राकेश शर्मा का नाम प्राथमिकी में नहीं था, फिर भी उन्हें चार से आठ मई तक राज्य अपराध शाखा, भोंडसी के कुछ पुलिस अधिकारियों, जिनमें उप-निरीक्षक प्रवीण कुमार और जांच अधिकारी योगेंद्र सिंह शामिल थे, द्वारा हिरासत में लिया गया और उन्हें यातनाएं दी गई तथा उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
एचएचआरसी के आदेश के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भोंडसी स्थित राज्य अपराध शाखा के परिसर में उनके पति के साथ मारपीट की गई, उनके कपड़े उतारे गए, उन्हें धमकाया गया, उनसे जबरन कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए और अन्य अपमानजनक और अमानवीय कृत्य किए गए, जिससे उन्हें गंभीर शारीरिक और मानसिक आघात पहुंचा।
शिकायत में चार से आठ मई तक परिसर की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है।
एचएचआरसी के आदेश में कहा गया है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इससे मानवीय गरिमा, शारीरिक अखंडता, भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी के संरक्षण के संबंध में गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
भाषा
राखी माधव
माधव