कोलकाता, 21 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को कथित नफरती भाषण मामले में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पांच अक्टूबर तक अंतरिम राहत दे दी।
पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से लोकसभा सदस्य महुआ का दावा है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है।
महुआ ने अदालत से इस मामले में पुलिस की ओर से किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी करने का अनुरोध किया था। उन्होंने नदिया जिले के होगलबरिया थाने में दर्ज मामले से जुड़ी कार्यवाही रद्द करने का भी आग्रह किया था।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने महुआ को निर्देश दिया कि वह मामले में पूछताछ के लिए 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष पेश हों।
अदालत ने कहा कि पांच अक्टूबर तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित शर्तों का पालन करने की शर्त पर महुआ के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मामले में महुआ पर लगाई गई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत अधिकतम सजा सात साल से कम है।
उसने कहा कि अगर महुआ जांच में सहयोग करती हैं, तो वह दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा पाने की हकदार हैं।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने महुआ को जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी के समक्ष पेश होकर पुलिस नोटिस का पालन करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
महुआ के वकील के आग्रह पर न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने पुलिस को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जब तृणमूल सांसद जांच एजेंसी के सामने पेश हों, तो उन पर अंडे न फेंके जाएं।
महुआ के वकील ने अदालत से कहा कि तृणमूल सांसद अभी दिल्ली में हैं और वह संसद के मानसून सत्र में व्यस्त रहेंगी, जो 13 अगस्त तक चलेगा।
उन्होंने दलील दी कि जरूरत पड़ने पर वह (महुआ) 13 अगस्त तक जांच अधिकारी के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश हो सकती हैं और 14 अगस्त को या उसके बाद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होंगी।
राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता सुरजीत नाथ मित्रा ने महुआ की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि तृणमूल सांसद ने जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए पहले जारी किए गए चार नोटिस पर अमल नहीं किया।
भाषा पारुल सुरेश
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