नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को सोशल मीडिया मंचों को निर्देश दिया कि वे पिछले महीने सैद-उल-अजैब में एक बहुमंजिला इमारत के ढहने के संबंध में एक मौजूदा न्यायाधीश को कथित तौर पर लक्षित करने वाली अपमानजनक सामग्री को हटा दें।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएचसीबीए) की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा और न्यायमूर्ति मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने कहा, ‘‘सब कुछ तुरंत हटा दिया जाए।’’
इस याचिका में सोशल मीडिया उपयोगकर्ता डॉ. कपिल काकर के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई का अनुरोध किया गया था, जिन्होंने अपने ‘अपमानजनक’ वीडियो में उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश को उस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया था जिसमें छह लोगों की जान गई थी।
डीएचसीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने बताया कि काकर ने सोशल मीडिया मंचों पर ऐसे वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें उन्होंने न्यायाधीश के खिलाफ अवमानना के आरोप लगाए थे, जिन्होंने कथित तौर पर पहले इमारत में अवैध निर्माण से संबंधित एक मामले की सुनवाई की थी।
पीठ ने कहा कि ‘कोई छोटी बात नहीं’ है और सवाल किया कि सोशल मीडिया मंचों ने उन वीडियो को स्वयं ही क्यों नहीं हटाया।
अदालत ने सोशल मीडिया मंचों से प्रश्न किया, ‘‘कुछ जिम्मेदारी भी होनी चाहिए। जब आपको ऐसी बेहद आपत्तिजनक बात की जानकारी हो जाती है, तो आप इन्हें हटाते क्यों नहीं? जब यह आपके संज्ञान में आ जाता है, तो आप स्वयं कार्रवाई क्यों नहीं कर सकते?’’
अदालत ने कहा, ‘‘यह कोई एक मामला नहीं है। ऐसा हर दिन हो रहा है।’’
वहीं मेटा, गूगल और लिंक्डइन की ओर से पेश हुए वकीलों ने अदालत को आश्वासन दिया कि अदालत के निर्देशों के अनुसार वीडियो हटा दिए जाएंगे।
डीएचसीबीए ने हालांकि दावा किया कि आपत्तिजनक सामग्री से नुकसान हो चुका है, अदालत ने टिप्पणी की, ‘‘लोगों की याददाश्त कमज़ोर होती है। यह केवल सनसनी फैलाने के लिए है..।’’
डीएचसीबीए ने यह भी अनुरोध किया कि वीडियो हटाने के अलावा, कथित अवमाननाकर्ता के सोशल मीडिया अकाउंट को भी ब्लॉक किया जाए।
अदालत ने कहा कि वह इस मामले में आदेश पारित करेगी।
भाषा शोभना प्रशांत
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