TMC MP Resignation: सुखेंदु शेखर शेयर के बाद टीएमसी के 14 सांसद भी देंगे पार्टी से इस्तीफा? सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद कयासों का बाजार गर्म

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TMC MP Resignation: सुखेंदु शेखर शेयर के बाद टीएमसी के 14 सांसद भी देंगे पार्टी से इस्तीफा? सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद कयासों का बाजार गर्म

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  • Publish Date - June 8, 2026 / 03:31 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 03:32 PM IST

TMC MP Resignation: सुखेंदु शेखर शेयर के बाद टीएमसी के 14 सांसद भी देंगे पार्टी से इस्तीफा? सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद कयासों का बाजार गर्म / Image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • टीएमसी में बढ़ी बगावत, राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा
  • 14 बागी सांसदों की मुलाकात की चर्चा
  • 60 विधायकों ने किया नेतृत्व का विरोध

कोलकाता: TMC mp Resignation विधानसभा चुनाव 2026 के बाद से टीएमसी में मची अंतर्कलह अब फूटकर सामने आने लगी है। पार्टी के विधायकों और सांसदों की नाराजगी अब विपक्ष को भारी पड़ने लगी है। नाराजगी के चलते आज राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, अब खबर आ रही है कि तृणमूल कांग्रेस के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। ये मुलाकात बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर हुई है।

14 बागी सांसद भी छोड़ेंगे टीएमसी?

TMC mp Resignation यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है। पार्टी के विधायी दल में विद्रोह और विभिन्न गुटों के बीच बढ़ते तनाव ने संगठन को हिलाकर रख दिया है। अपने इस्तीफे में राय ने कहा कि वे अपनी संसद सदस्यता छोड़ रहे हैं और तृणमूल से अपना नाता तोड़ रहे हैं।

टीएमसी में अंतर्कलह

बता दें कि टीएमसी में पैदा हुआ यह संकट अचानक नहीं आया। इसकी शुरुआत उस समय मानी जा रही है जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से बाहर कर दिया गया था। इससे पहले दोनों नेताओं की विधानसभा परिसर में स्पीकर के कक्ष में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ हुई कथित मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया था। इसके बाद शहर के एक होटल में हुई कथित गोपनीय बैठक की खबरें सामने आईं थी। पार्टी नेता कुणाल घोष द्वारा इस बैठक का उल्लेख किए जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई कि टीएमसी के भीतर एक बड़ा समूह नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है।

 

अलग दल बनाना चाहते हैं बागी नेता

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक बागी विधायकों का एक वर्ग पार्टी से अलग होकर नया दल बनाने के बजाय खुद को “असली टीएमसी” के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है और अब हुआ भी ऐसा ही।विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है। राजनीतिक विश्लेषक इस स्थिति की तुलना महाराष्ट्र में हुए दलगत विभाजन से कर रहे हैं, जहां पार्टी के भीतर ही नेतृत्व को चुनौती देकर नया शक्ति केंद्र उभरा था।

ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था। इसके बाद पार्टी में बगावत हो गई है। 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मुलाकात कर उनसे कहा कि वे TMC के असली गुट हैं और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी जाए। विधायकों की अपील पर विचार करते हुए स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है। स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी दे दी है। टीएमसी के इस गुट में चार उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं। इनके नाम हैं- जावेद अहमद खान, शबीना यास्मीन, शीलू साह, और संदीपन साह। अखरूजमा सदन में टीएमसी के चीफ व्हिप होंगे। स्पीकर के इस फैसले से साफ हुआ है उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली टीएमसी को असली तृणमूल कांग्रेस माना है।

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टीएमसी में नया राजनीतिक संकट क्या है?

टीएमसी के भीतर कथित गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है, जिससे पार्टी में बगावत की स्थिति बन गई है।

सुखेंदु शेखर राय ने क्या फैसला लिया है?

उन्होंने राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है।

14 बागी सांसदों को लेकर क्या दावा किया जा रहा है?

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि 14 नाराज सांसदों ने दिल्ली में शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की है।

टीएमसी में बगावत की शुरुआत कैसे हुई?

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद असंतोष बढ़ा।

ऋतब्रत बनर्जी को लेकर क्या दावा किया जा रहा है?

दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में विधायकों ने उन्हें समर्थन दिया और उन्हें नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिलने की बात सामने आई है।