नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह निजी स्कूलों की ओर से दायर उन याचिकाओं पर 18 अप्रैल को सुनवाई करेगा, जिनमें दिल्ली सरकार के हालिया फीस विनियमन कानून को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि वह “मामले का एक ही बार में निपटारा” करना चाहती है और याचिकाओं को किसी शनिवार को सूचिबद्ध करने का निर्देश दिया।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि मामले में तत्काल सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि कुछ स्कूल फीस का भुगतान न किए जाने के कारण छात्रों को निकाल रहे हैं।
इस पर पीठ ने कहा कि उसने निजी स्कूलों को आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए ‘स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समिति’ गठित करने के आदेश के कार्यान्वयन को पहले ही स्थगित कर दिया है।
हालांकि, पीठ ने कहा कि वह याचिकाओं का “जितनी जल्दी हो सके” निपटारा करेगी।
उसने कहा, “जब कोई अन्य मामला सूचीबद्ध न हो, तभी इस मामले को सूचीबद्ध करें। इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल को सूचीबद्ध करें।”
दिल्ली उच्च न्यायालय हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को भी मामलों की सुनवाई करता है।
सरकार की ओर से पेश वकील ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूल न्यायिक आदेशों का उल्लंघन करते हुए फीस बढ़ा रहे हैं।
इस पर पीठ ने ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकार अवमानना का मुकदमा दायर कर सकती है।
‘एक्शन कमेटी अनएडेड रिकग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ और ‘फोरम ऑफ माइनॉरिटी स्कूल्स’ जैसे कई स्कूल संघों ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम 2025 की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण, मनमाना और द्वेषपूर्ण का है।
इस अधिनियम को 14 अगस्त 2025 को अधिसूचित किया गया था और यह उसी साल 10 दिसंबर को लागू हुआ था।
भाषा पारुल रंजन
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