चेन्नई, 31 अगस्त (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को सरकारी स्वामित्व वाली शराब की दुकानों पर प्रति बोतल 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने को लेकर सत्ता पक्ष और मुख्य विपक्षी दल द्रविड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
ये दुकानें तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टासमैक) के अधीन हैं।
राज्य के मद्यनिषेध एवं आबकारी मंत्री के. विग्नेश ने इस प्रथा की शुरुआत का आरोप पिछली द्रमुक सरकार पर मढ़ते हुए स्पष्ट किया कि वसूले जा रहे यह 10 रुपये कोई सरकारी शुल्क नहीं हैं।
इस व्यवस्था की शुरुआत की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि यह वसूली दो रुपये प्रति बोतल से शुरू हुई थी, ताकि 2,000 रुपये के मामूली वेतन पर रखे गए दुकान के कर्मचारियों की मदद की जा सके। समय के साथ, यह राशि बढ़कर पांच रुपये और आखिरकार 10 रुपये हो गई, ताकि दुकान के आवश्यक खर्चों- जैसे बिजली बिल, किराया और रखरखाव- को पूरा किया जा सके, जिसके लिए तत्कालीन द्रमुक प्रशासन पर्याप्त बजटीय आवंटन नहीं करता था।
विधानसभा में विग्नेश ने कहा, ‘पिछली द्रमुक सरकार ने टासमैक कर्मचारियों के वेतन में संशोधन या दुकानों के नियमित रखरखाव के लिए फंड देने का कोई कदम नहीं उठाया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिल वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाया है और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के उपाय कर रही है।’
पूर्व द्रमुक मंत्री के. एन. नेहरू ने सवाल उठाया कि जब मंत्री खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वर्षों से प्रति बोतल 10 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं, तो द्रमुक को भ्रष्ट प्रथाओं के लिए कैसे दोषी ठहराया जा सकता है।
नेहरू ने तर्क दिया, ‘आपने पहले इस अतिरिक्त शुल्क को भ्रष्टाचार करार दिया था। यदि यह प्रथा पिछले कार्यकालों में ‘भ्रष्ट’ मानी गई थी, तो इसे अब भी जारी रखना उतना ही अनुचित और गलत है।’
जवाब में मंत्री ने कर्मचारियों की कामकाजी स्थितियों को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार के सत्ता में आने से पहले टासमैक कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन 14,000 रुपये था, कटौतियों के बाद उनके हाथ में केवल 11,000 रुपये के आसपास आता था।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा प्रशासन इस अनियमितता को सही नहीं ठहरा रहा है, बल्कि इसे खत्म करने के लिए ढांचागत कमियों को दूर कर रहा है।
भाषा
सुमित सुरेश
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