हेडगेवार ने विदेशी शासन से देश को मुक्त कराने के लिए आरएसएस की स्थापना की थी: भागवत

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हेडगेवार ने विदेशी शासन से देश को मुक्त कराने के लिए आरएसएस की स्थापना की थी: भागवत

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 01:14 AM IST,
    Updated On - April 12, 2026 / 01:14 AM IST

हैदराबाद, 11 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदुओं में एकता की कमी को दूर करने और उन्हें मजबूत एवं सद्गुणी बनाकर देश को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के उद्देश्य से संघ की स्थापना की थी।

तेलंगाना के निजामाबाद जिले में हेडगेवार के पैतृक गांव कंदाकुर्थी में ‘श्री केशव स्फूर्ति मंदिर’ के उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के लिए राजनीतिक एवं सशस्त्र प्रतिरोध समेत विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया था।

उन्होंने कहा कि ईमानदारी उनका गुण था, जिसकी उनके साथियों ने भी सराहना की।

भागवत ने कहा कि स्वतंत्रता के लिए काम करते हुए हेडगेवार ने महसूस किया कि भारतीयों को गुलाम बनाने वाले अंग्रेज पहले विदेशी नहीं थे।

उन्होंने कहा कि इस चिंता को उस समय के कुछ अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने भी साझा किया था।

भागवत ने कहा, “इसका मतलब है कि बाहरी लोगों की ताकत से ज्यादा हमारे अंदर ही कुछ कमी थी, जिसके कारण हम पराजित होते रहे। इसलिए उस कमी को दूर किया जाना था। हिंदू समाज में एकता की कमी थी। वास्तव में, हिंदू समाज में विविधता का सम्मान किया जाता रहा है।”

भागवत ने कहा कि हिंदुत्व का अर्थ है अपने मार्ग पर चलकर और दूसरों का सम्मान करते हुए सौहार्दपूर्ण जीवन जीना।

उन्होंने बताया कि हेडगेवार चाहते थे कि हिंदू मजबूत, निडर और सद्गुणी बनें।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हेडगेवार द्वारा तैयार की गई संघ की प्रार्थना इन गुणों को दर्शाती है।

उन्होंने कहा, “हेडगेवार का मानना था कि हम बार-बार (विदेशी शासकों से) पराजित होते रहे हैं और कुछ कमियां हैं। किसी को इन्हें दूर करना चाहिए, वरना हमें बार-बार स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।”

भागवत ने कहा कि उस दौर के नेताओं ने अपने-अपने रास्ते चुने, जबकि हेडगेवार ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए काम करने की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली।

उन्होंने कहा, “आरएसएस की स्थापना उसी (जिम्मेदारी) से हुई थी। इसकी स्थापना किसी के खिलाफ नहीं की गई थी, बल्कि सबके काम को पूरा करने के लिए की गई थी। यह किसी पर प्रहार करने के लिए नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि को गुलामी से मुक्त कराने के लिए स्थापित किया गया था।”

भाषा जोहेब सुरेश

सुरेश