शिमला, दो सितंबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार को बिना शिक्षकों या केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे स्कूलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक रीना कश्यप ने अपने निर्वाचन क्षेत्र पच्छाद में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई स्कूल बिना किसी शिक्षक के चल रहे हैं और सरकार से अपने क्षेत्र में शिक्षकों की नियुक्ति करने का आग्रह किया।
इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राज्य में देश का सबसे बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) 1:10 है, यानी हर 10 छात्रों पर एक शिक्षक नियुक्त है।
हालांकि, दूरदराज के इलाकों में अब भी शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि सरकार युक्तिकरण प्रक्रिया के माध्यम से इन क्षेत्रों में खाली पदों को भरने का प्रयास कर रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि शिक्षकों की तैनाती में कई तरह के दबाव होते हैं और कभी-कभी नियुक्ति आदेशों में बदलाव किया जाता है।
उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार अब तक रिकॉर्ड 9,000 शिक्षकों के पद भर चुकी है और मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने से पहले 6,500 और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
इसके बावजूद, राज्य के 150 स्कूल बिना किसी शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि 3,500 स्कूलों में केवल एक शिक्षक तैनात है। इसके अलावा, 2,500 ऐसे स्कूल हैं, जहां 15 से भी कम छात्र पढ़ रहे हैं।
इससे पहले, पच्छाद से जुड़े मुद्दे को उठाते हुए रीना कश्यप ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के 12 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। इनमें से कई स्कूलों में 40 से अधिक छात्र पढ़ते हैं। अभिभावक खुद धन जुटाकर शिक्षकों की नियुक्ति कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नारग के छह और सराहन के पांच स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है। प्राचार्यों और प्रवक्ताओं के कई पद भी खाली पड़े हुए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि राज्य सरकार एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नीति तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सिरमौर को ‘आकांक्षी जिला’ घोषित किया है, लेकिन इस जिले के छात्र लिखित भर्ती परीक्षाओं के माध्यम से सफलतापूर्वक चयनित हो रहे हैं।
भाषा तान्या रंजन
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