अहमदाबाद, 31 अगस्त (भाषा) दक्षिण गुजरात के जिलों में हाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ की वजह से स्कूलों में कक्षाएं बाधित होने के बावजूद, पाठ्यक्रम पूरा करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि छात्रों पर बुरा असर न पड़े। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के लिए पाठ्यक्रम पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव (प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा) मिलिंद तोरावणे ने कहा, “राज्य के पाठ्यक्रम के अनुसार, 220 शैक्षणिक दिनों की आवश्यकता होती है। सर्दियों और गर्मियों की सामान्य छुट्टियों के अलावा, स्थानीय प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर समय-सारणी में बदलाव कर सकता है, क्योंकि पाठ्यक्रम पूरा करना प्राथमिकता है।”
उन्होंने कहा कि रविवार और गर्मी व सर्दियों की छुट्टियों को ध्यान में रखने के बाद भी, काम के लिए काफी दिन बचते हैं जिनका इस्तेमाल पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “प्राथमिकता छुट्टियों के दौरान कक्षाएं लेने के बजाय पाठ्यक्रम पूरा करने की है, इसलिए वे अपनी समझ से बदलाव करते हैं। इस बारे में केंद्रीय स्तर से कोई निर्देश नहीं हैं – स्थानीय हालात के आधार पर अपनी अकादमिक गतिविधियों को प्रबंधित करना उन (स्कूलों) पर निर्भर है।”
तोरावणे ने बताया कि कई छात्रों ने अपनी पाठ्यपुस्तकें खोने की बात भी बताई थी, और बारिश से प्रभावित जिलों से मिली जानकारी के आधार पर शिक्षा विभाग ने उनकी भरपाई कर दी है।
उन्होंने कहा, “शिक्षा मंत्री ने उस समय खोई हुई पाठ्यपुस्तकों की जगह दूसरी पुस्तकें देने की घोषणा की थी, और सभी को पुस्तकें मिल गई हैं। जिलों से नुकसान के बारे में मिली जानकारी के आधार पर पाठ्यपुस्तकें दोबारा बांटी गई हैं।”
भाषा प्रशांत अविनाश
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