जम्मू, 28 मार्च (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि केवल केबल कार परियोजनाओं के भरोसे पर्यटन को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता, इसके लिए बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और सतत विकास पर आधारित समग्र रणनीति बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कर्नाह क्षेत्र में केबल कार परियोजना को लेकर यह मान लेना गलत है कि इससे स्वतः ही बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगेंगे।
उमर ने गुलमर्ग का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां गोंडोला प्रमुख आकर्षण है, लेकिन अन्य स्थानों पर ऐसी परियोजना वैसी सफलता हासिल नहीं कर सकी हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रीनगर, जम्मू और पटनीटॉप में केबल कार परियोजनाओं को गुलमर्ग जैसी पर्यटकों की संख्या नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के लिए क्षेत्र विशेष के अनुरूप व्यापक योजना बनानी होगी। कर्नाह क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता का जिक्र करते हुए उमर ने स्वीकार किया कि अब तक इसके पर्यटन विकास के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं।
उमर ने कहा कि दूरदराज और पिछड़े इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने यहां ट्रैकिंग और हाइकिंग जैसे साहसिक पर्यटन की संभावनाओं पर भी बल दिया।
सतत और समावेशी विकास की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े होटलों के बजाय स्थानीय स्तर पर ‘होमस्टे’ को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को सीधे आर्थिक लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग लगातार नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के प्रयास कर रहा है, संसाधनों और व्यवहार्यता के आधार पर इन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि डोडा जिले के पर्यटन स्थलों जैसे लाल द्रामन, देदनी, दल द्रामन, रामरचना, गलाधार और देसा में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं। साथ ही भद्रवाह के उधराना और सरना सहित कई नए क्षेत्रों को पर्यटन स्थल के रूप में अधिसूचित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
इस दौरान मंटालाई स्थित अंतरराष्ट्रीय योग एवं वेलनेस केंद्र का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक इस केंद्र के संचालन के लिए उपयुक्त एजेंसी नहीं मिल पाई है।
उन्होंने बताया कि यह केंद्र नया नहीं है, बल्कि इसकी स्थापना पहले धीरेंद्र ब्रह्मचारी के आश्रम के रूप में हुई थी, जिसे बाद में सरकार ने अपने अधीन ले लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही नए सिरे से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) जारी करेगी और शर्तों में कुछ ढील देकर इसे संभावित संचालकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने का प्रयास करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि जल्द ही कोई सक्षम एजेंसी सामने आएगी, जिससे यह केंद्र फिर से सक्रिय हो सकेगा।
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