गृह मंत्रालय उच्चतम न्यायालय के साथ मिलकर लंबित मामलों को कम करने का खाका तैयार कर रहा: शाह

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गृह मंत्रालय उच्चतम न्यायालय के साथ मिलकर लंबित मामलों को कम करने का खाका तैयार कर रहा: शाह

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  • Publish Date - June 19, 2026 / 10:22 PM IST,
    Updated On - June 19, 2026 / 10:22 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि उनका मंत्रालय ‘‘उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर’’ लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए एक खाका तैयार कर रहा है।

शाह ने कहा कि सायंकालीन अदालतों की स्थापना और दोनों न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों के निपटान के लिए नयी व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि नयी आपराधिक न्याय संहिताओं का उद्देश्य स्पष्ट है— देश में कहीं भी कोई अपराध दर्ज होने पर उसकी पूरी न्यायिक प्रक्रिया, जिसमें उच्चतम न्यायालय तक की अपीलें भी शामिल हैं, तीन वर्ष के भीतर पूरी हो जानी चाहिए और ”अपराध सिद्ध” हो जाना चाहिए।

शाह के हवाले से एक सरकारी बयान में कहा गया कि मंत्रालय किसी भी कीमत पर देरी को बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक आधार पर आरोप-पत्र तैयार करने होंगे, प्रभावी अभियोजन और ‘‘अदालतों का पूर्ण सहयोग करना होगा।’’

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा यहां आयोजित अखिल भारतीय फिंगरप्रिंट सम्मेलन-2026 के उद्घाटन के मौके पर शाह ने कहा कि पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को अपराध स्थल से साक्ष्यों को सटीक रूप से एकत्र करना चाहिए ताकि शीघ्र और सही दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे के लिए सायंकालीन अदालतें स्थापित करने और नए तंत्र बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।”

शाह ने एनसीआरबी-अभिज्ञान, सीआरपीआई, ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 और ई-फॉरेंसिक्स 2.0 ऐप की शुरुआत भी की।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि समय आ गया है कि आपराधिक न्याय प्रणाली को इस प्रकार प्रभावी बनाया जाए कि वह संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने का एक सशक्त जरिया बन सके।

उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 से मोदी सरकार ने आपराधिक कानूनों में बुनियादी सुधार लाने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू किया है।

शाह ने कहा कि उद्देश्य केवल आपराधिक न्याय प्रणाली का आधुनिकीकरण करना ही नहीं है, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को इसका अभिन्न अंग बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के आपराधिक न्याय सुधारों का एक प्रमुख उद्देश्य प्राथमिकी दर्ज होने के तीन वर्षों के भीतर न्याय सुनिश्चित करना है, और इसे सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों में देश इस लक्ष्य को हासिल करने के करीब पहुंच गया है, जिसमें एनसीआरबी ने इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

शाह ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य अपराध से लड़ने का सबसे शक्तिशाली हथियार है।

उन्होंने कहा कि पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को अपराध स्थल से साक्ष्यों को सटीक रूप से एकत्र करना चाहिए ताकि शीघ्र और सही दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने (पुराने आपराधिक कानूनों में मौजूद) खामियों की पहचान की और उनमें से 90 प्रतिशत कानूनी कमियों को दूर कर दिया गया है।’’

देशभर के पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उनसे समय पर आरोप-पत्र दाखिल करने, अभियोजन के साथ समन्वय बनाए रखने तथा अदालतों में मामलों की प्रभावी पैरवी करने को कहा, ताकि समय पर निर्णय सुनिश्चित किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि अपराध स्थलों से एकत्र किए गए सभी डेटा का विश्लेषण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग उपकरणों की मदद से किया जाना चाहिए, ताकि अपराध के तरीके का पता लगाया जा सके, जिससे न केवल अपराधों को रोका जा सके बल्कि अपराधियों को भी तेजी से पकड़ा जा सके।

शाह ने कहा कि न केवल राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) का उपयोग अपराधियों की पहचान के लिए किया जाना चाहिए, बल्कि अपराध स्थलों से एकत्र किए गए फिंगरप्रिंट जोड़कर इसके डेटाबेस को और समृद्ध भी किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले हैं, जहां एनएएफआईएस ने सबसे जटिल मामलों को भी सरल बनाने में बहुत मदद की है। लेकिन, मेरा अभी भी मानना है कि एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल 10 प्रतिशत ही किया जा रहा है।’’

शाह ने कहा, ‘‘एनएएफआईएस का इस्तेमाल केवल अपराधियों को खोजने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह तभी सफल हो सकता है, जब आप हर अपराध स्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट के माध्यम से एनएएफआईएस के डेटा को समृद्ध करें।’’

शाह ने कहा कि यह दो-तरफा प्रणाली है जो अपराधी की पहचान करने में बहुत उपयोगी है, लेकिन अपराध तभी साबित हो सकता है, जब डेटा तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘जब आपराधिक न्याय प्रणाली की बात आती है, तो हमारा देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले के समय में, पुलिस थाने को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एक जरिया माना जाता था। यदि कहीं कोई विवाद होता था, तो थाना प्रभारी (एसएचओ) मामले का निपटारा कर देता था; अन्यथा मामला अदालत में चला जाता था और मामले वर्षों तक लंबित पड़े रहते थे।’’

उन्होंने राज्य सरकारों और पुलिस को सीसीटीएनएस के 100 प्रतिशत विस्तार को हासिल करने के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम देश के सभी 17,840 पुलिस थानों तक सीसीटीएनएस की पहुंच सुनिश्चित करने में सफल रहे हैं, और आज हमारे पास 37.86 करोड़ प्राथमिकी हैं, जिनमें पुराना डेटा भी शामिल है।”

शाह ने कहा कि 22,000 अदालतों को ई-कोर्ट से जोड़ा गया है।

शाह ने नये आपराधिक कानूनों के तहत उपलब्ध उपकरणों के उपयोग के लिए प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि आरोप-पत्र में केवल वही आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, जो किसी अपराधी की भूमिका की पुष्टि करते हों।

उन्होंने कहा कि अनुभवी सरकारी अभियोजकों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें जांच, अभियोजन और दोषसिद्धि की पूरी प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के सक्रिय इस्तेमाल के लिए बहुत बेहतर ढंग से काम करना होगा।’’

भाषा

देवेंद्र पवनेश

पवनेश