हुड्डा ने विनेश फोगाट से जुड़े मामले में केंद्रीय खेल मंत्री के हस्तक्षेप की मांग की

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हुड्डा ने विनेश फोगाट से जुड़े मामले में केंद्रीय खेल मंत्री के हस्तक्षेप की मांग की

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 08:02 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 08:02 PM IST

चंडीगढ़, 12 मई (भाषा) कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने महिला पहलवान विनेश फोगाट से जुड़े मामले में केंद्रीय खेल मंत्री के तत्काल हस्तक्षेप की मंगलवार को मांग की। उन्होंने कहा कि देश का मान बढ़ाने वाली विनेश के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए।

हुड्डा ने कहा कि ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी विनेश की ओर से लगाए जा रहे आरोप बेहद गंभीर हैं।

उन्होंने केंद्रीय खेल मंत्री के तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा, “विनेश फोगाट ने कई मौकों पर देश का नाम रोशन किया है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार और खेल निकायों की यह जिम्मेदारी बनती है कि उनकी गरिमा से किसी भी तरह का समझौता न हो।”

हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता हुड्डा ने एक बयान में कहा कि अगर विनेश फोगाट एशियाई खेलों या अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में योग्यता के आधार पर हिस्सा लेना चाहती हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से ऐसा करने का मौका दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हालांकि गोंडा में विनेश फोगाट को न तो स्पर्धा में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई और न ही उन्हें प्रशिक्षण हॉल का इस्तेमाल करने दिया गया।

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के ‘कारण बताओ नोटिस’ का जवाब देने के बाद उत्तर प्रदेश के गोंडा में राष्ट्रीय ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के विनेश के प्रयास को डब्ल्यूएफआई ने सोमवार को खारिज कर दिया, जिसे लेकर नया विवाद शुरू हो गया।

विनेश ने इस कदम को अपनी वापसी को रोकने की “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि डोपिंग विरोधी नियमों के तहत संन्यास से वापसी करने वाले एथलीटों के लिए अनिवार्य छह महीने की नोटिस अवधि के कारण महासंघ द्वारा उन्हें 26 जून 2026 तक अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद वह प्रतियोगिता में वापसी के लिए योग्य हैं।

हालांकि, डब्ल्यूएफआई ने विनेश की दलीलों को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि विनेश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी होने तक वह टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकती हैं।

हुड्डा ने कहा कि डब्ल्यूएफआई के कामकाज पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इसलिए यह बेहद जरूरी है कि केंद्रीय खेल मंत्री खुद इस पूरे मामले का संज्ञान लें और हस्तक्षेप करके यह सुनिश्चित करें कि किसी भी एथलीट को उसके उचित अधिकारों से वंचित न किया जाए।”

भाषा पारुल नरेश

नरेश