कोलकाता, 29 जनवरी (भाषा) कोलकाता में सरकारी दंत अस्पताल के चिकित्सकों ने 900 दिनों से अधिक समय से अपना मुंह बंद कर पाने में असमर्थ लड़की का सफलता पूर्वक उपचार किया। यह लड़की एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका संबंधी विकार से पीड़ित थी। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि लगभग 10 साल की यह लड़की एक ऐसी स्थिति से पीड़ित थी जिसमें उसके जबड़े और चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पहुंचा और इस कारण वह लगभग 912 दिन से अपना मुंह बंद नहीं कर पा रही थी।
उन्होंने बताया कि राज्य में और इसके बाहर कई अस्पतालों में उपचार के बावजूद उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद लड़की को आर अहमद डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल में लाया गया जहां उपचार के बाद आखिरकार वह अपना मुंह बंद कर पाने में सक्षम हो गई है।
अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ” वह एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षित तंत्रिका संबंधी विकार, एक्यूट डिससेमिनेटेड एन्सेफेलोमायलाइटिस (एडीईएम) से पीड़ित थी, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है।’
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुंह बंद न कर पाने की स्थिति से कई जटिलताएं उत्पन्न हुईं, जिनमें जबड़े का संतुलन बिगड़ना और दांतों का असामान्य रूप से ऊपर की ओर खिसकना (जिसे सुप्रा-एरप्शन कहा जाता है) शामिल हैं।
अस्पताल में उपचार की योजना बनाने के लिए एक विशेष चिकित्सीय समिति का गठन किया गया। विस्तृत मूल्यांकन के बाद चिकित्सकों ने निष्कर्ष निकाला कि मुंह बंद करना चिकित्सकीय रूप से अत्यावश्यक है।
उपचार में शामिल एक चिकित्सक ने कहा, ”इस मामले में जबड़े को बंद करने और आगे की जटिलताओं को रोकने के लिए पिछले दांतों को निकालना ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प था।”
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के बाद अब लड़की अपना मुंह बंद करने में सक्षम है।
भाषा तान्या पवनेश
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