मानवाधिकार आयोग ने प्रवासी मजदूर पर हमले के मामले में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया

मानवाधिकार आयोग ने प्रवासी मजदूर पर हमले के मामले में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया

मानवाधिकार आयोग ने प्रवासी मजदूर पर हमले के मामले में तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी किया
Modified Date: February 10, 2026 / 05:51 pm IST
Published Date: February 10, 2026 5:51 pm IST

नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के तिरुतानी रेलवे क्वार्टर के पास चार किशोरों द्वारा एक प्रवासी मजदूर पर कथित रूप से हमला किए जाने के लगभग एक महीने बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है जिसमें पीड़ित का जल्द से जल्द ‘‘पता’’ लगाने और उसे आवश्यक चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराने को कहा गया है।

एनएचआरसी ने नोटिस में यह भी पूछा है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पीड़ित को दो लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश क्यों नहीं की जानी चाहिए।

पीड़ित की पहचान सूरज नामक प्रवासी मजदूर के रूप में की गई है।

तमिलनाडु पुलिस के अनुसार, 17 वर्षीय चार किशोरों को 28 दिसंबर को पकड़ कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया।

बोर्ड के आदेशानुसार, तीन को किशोर गृह भेजा गया और चौथे को उसके माता-पिता को सौंप दिया गया।

नौ फरवरी के नोटिस में कहा गया, ‘‘28 दिसंबर को तिरुवल्लूर सरकारी अस्पताल ने पीड़ित को बेहतर चिकित्सा के लिए चेन्नई के राजीव गांधी सरकारी सामान्य अस्पताल रेफर किया था। लेकिन रिकॉर्ड के अनुसार, यह पाया गया कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद पीड़ित उसी दिन अस्पताल से चला गया।’’

आयोग को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में मध्यप्रदेश के एक प्रवासी मजदूर के साथ हुई ‘‘गंभीर हिंसा’’ की शिकायत मिली है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वायरल वीडियो और पुलिस खुलासों के अनुसार, पीड़ित को चलती ट्रेन में धमकाया गया था।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़ित को जबरन रेलवे स्टेशन के पास सुनसान जगह पर ले जाकर उस पर चार नाबालिगों ने धारदार हथियार से हमला किया। हमले का वीडियो भी बनाया गया जिसमें एक हमलावर ‘विजय चिन्ह’ दिखाता नजर आया।

एनएचआरसी ने इस मामले का संज्ञान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत लिया है। शिकायतकर्ता ने आयोग से स्वतंत्र जांच, सख्त कानूनी कार्रवाई, पीड़ित के लिए मुआवजा और प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा की मांग की।

पीड़ित की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उच्च चिकित्सा सुविधा में भेजा गया, लेकिन वह चिकित्सकीय परामर्श के बावजूद अस्पताल से चला गया और अब तक उसका पता नहीं चल सका है।

आयोग ने कहा कि यह राज्य तंत्र की “गंभीर चूक” और “घोर लापरवाही” को दर्शाता है, क्योंकि पीड़ित को पर्याप्त सुरक्षा, निगरानी या सहायता नहीं मिली।

तमिलनाडु सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

एनएचआरसी ने मुख्य सचिव, तमिलनाडु सरकार को सात दिन में जवाब देने का निर्देश देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया और कहा कि उन्हें पीड़ित को सभी आवश्यक चिकित्सा उपचार, परामर्श आदि उपलब्ध कराना होगा।

एनएचआरसी ने पुलिस महानिदेशक को भी निर्देश दिया कि पीड़ित का जल्द पता लगाकर उसे चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए।

भाषा खारी नरेश

नरेश


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