भुवनेश्वर, 23 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने थाईलैंड में एक नियोक्ता द्वारा बंदी बनाए गए ओडिशा के छह श्रमिकों के संबंध में विदेश मंत्रालय की राय पूछी है। सोमवार को यहां जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
आयोग ने एक खबर पर स्वत: संज्ञान लिया कि केंद्रपाड़ा और भद्रक जिलों के छह लोगों को पिछले छह महीने से थाईलैंड में बैंकॉक के पास एक इलाके में नियोक्ता द्वारा प्रताड़ित किया गया।
यह घटना 17 फरवरी को तब सामने आई जब पीड़ितों ने अपनी दुर्दशा का वर्णन करते हुए एक वीडियो रिकॉर्ड किया। आरोप के अनुसार, उन्हें एक कारखाने के अंदर कैद कर दिया गया और उनके नियोक्ता द्वारा शारीरिक, साथ ही, मानसिक यातना दी गई।
बयान में कहा गया, ‘‘आयोग ने पाया है कि समाचार की सामग्री, यदि सच है, तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा उठाती है। इसलिए, उसने विदेश मंत्रालय से टिप्पणी करने को कहा है कि क्या वे पीड़ितों के परिवारों को कोई सहायता प्रदान कर सकते हैं। प्रतिक्रिया एक सप्ताह के भीतर अपेक्षित है।’’
खबर के मुताबिक, पीड़ित अगस्त 2025 में एक ठेकेदार के माध्यम से थाईलैंड गए थे, जिसने उन्हें अच्छे वेतन के साथ अच्छी नौकरी दिलाने का वादा किया था। हालांकि, उन्हें बिना वेतन या उचित भोजन के एक प्लाईवुड कारखाने में प्रतिदिन 12 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा नियोक्ता ने कथित तौर पर उनके पासपोर्ट भी जब्त कर लिए हैं।
ओडिशा सरकार के ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग ने कहा कि राज्य सरकार, विदेश मंत्रालय और अन्य के समन्वित प्रयासों के कारण छह में से चार श्रमिक पिछले सप्ताह के अंत में अपने घर लौट आए थे।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि दो अन्य श्रमिक वीजा संबंधी कुछ मुद्दों के कारण अभी भी थाईलैंड में हैं।
भाषा वैभव नेत्रपाल
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