Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Bilaspur High Court || Image- CG HC File
बिलासपुर: केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखने के लिए 36 वरिष्ठ पैनल लॉयरों की नियुक्ति कर दी है। (Bilaspur High Court News) यह नियुक्ति तीन साल के लिए होगी। विधि मंत्रालय ने पुराने पैनल लॉयर से केंद्र से संंबंधित मुकदमों की फाइलें वापस लेकर इनको सौंपने कहा है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जारी आदेश में कहा है कि राष्ट्रपति ने अधिवक्ताओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के मुकदमों (कर संबंधी मामलों को छोड़कर) का संचालन करने के लिए इस आदेश की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया है।
जिन अधिवक्ताओं को सीनियर काउंसिल बनया गया है उनमें भूपेन्द्र नारायण सिंह , रमाकांत पाण्डेय, अन्नपूर्णा तिवारी, उमाकांत सिंह चंदेल, अजित कुमार सिंह, हेमंत गुप्ता, मनोज कुमार मिश्रा, सतीश गुप्ता, किशन लाल साहू, हेमंत केशरवानी, अनमोल शर्मा, रूप नायक, मनय नाथ ठाकुर, अंकुर कश्यप, (Bilaspur High Court News) मांडवी भारद्वाज, हिमांशु पाण्डेय , रघुवीर प्रताप सिंह, सागर सोनी, अजय पाण्डेय, रविकांत पटेल, प्रमोद श्रीवास्तव, चेतन कुमार, अरविन्द पटेल, त्रिवेणी शंकर साहू, भरत कुमार गुलाबानी, प्रज्ञा पाण्डेय, अभिषेक बंजारे, अमितेश पाण्डेय, अंजू श्रीवास्तव, विद्या भूषण सोनी, अमन केशरवानी, शाल्विक तिवारी, सुचित्रा बैस, सौरभ चौबे, अमन ताम्रकार और अभिमन्यु रत्नपारखी का नाम शामिल हैं।
उपर्युक्त अधिवक्ताओं की नियुक्ति और पेशेवर शुल्क इस विभाग के 24 सितंबर 1999 के न्यायिक में निहित नियमों और शर्तों के अनुसार, 05 फरवरी 2026 के कार्यालय ज्ञापन तथा बाद में जारी किए गए कार्यालय ज्ञापनों, विशेष रूप से 08 फरवरी 2018 के कार्यालय ज्ञापन तथा 16 अक्टूबर 2024 के कार्यालय ज्ञापनों के माध्यम से पैनल अधिवक्ताओं पर कुछ प्रतिबंध लगाने वाले निर्देशों के अनुसार होंगे।
आईएसबीएम यूनिवर्सिटी रायपुर के डीआरडीए पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन रूरल डेवलपमेंट कोर्स को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों की पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में होने वाली नियुक्तियों पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है।
निवर्सिटी की डिग्री पर सवालिया निशान लगाते दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आगामी सुनवाई तक उन उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं जिनके पास संबंधित यूनिवर्सिटी की यह डिग्री है। (Bilaspur High Court News) मामले में राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सहित अन्य को नोटिस जारी किया गया है। अगली सुनवाई 16 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
प्रियांशु दानी सहित सात अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी द्वारा कराया जा रहा डिप्लोमा कोर्स निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता। इस संबंध में शिकायतों के बाद 16 सितंबर 2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी। इस समिति ने 9 अक्टूबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया है कि आईएसबीएम यूनिवर्सिटी का पीजीडीआरडी पाठ्यक्रम अवैध है।
जानकारी के अनुसार यह प्रोग्राम यूनिवर्सिटी के ऑर्डिनेंस नंबर 57 के तहत संचालित किया जा रहा है, जो वास्तव में कॉमर्स और मैनेजमेंट फैकल्टी के डिप्लोमा कोर्स से संबंधित है, रूरल डेवलपमेंट से नहीं। याचिका में कहा गया है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आयुक्त से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर इस पाठ्यक्रम को अमान्य माना गया है।