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नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को कहा कि 2024 को आधार वर्ष मानकर तैयार नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला भारतीय परिवारों के खपत रुझानों को बेहतर ढंग से पेश करेगी और खुदरा महंगाई के आंकड़ों में अस्थिरता कम होगी।
मल्होत्रा ने आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बजट-पश्चात बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “नई कार्यप्रणाली से सीपीआई के आकलन में दोनों ही तरह से सुधार होगा।”
नई शृंखला के तहत पहली बार जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी महीने में खुदरा महंगाई 2.75 प्रतिशत रही।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी नई सीपीआई शृंखला में 358 वस्तुओं के दाम शामिल हैं, जबकि पुरानी शृंखला में 299 वस्तुएं रखी गई थीं।
जनवरी की प्रमुख मुद्रास्फीति दर आरबीआई के लिए निर्धारित दो-छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के निचले स्तर से ऊपर रही।
वर्ष 2025 में नई एवं पुरानी दोनों शृंखलाओं के हिसाब से औसत महंगाई दर 2.2 प्रतिशत रही।
मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल की मौद्रिक नीति में जारी किए जाने वाले अगले अनुमान में नई शृंखला से जुड़े सभी बदलावों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सीपीआई शृंखला में बदलाव के कारण मुद्रास्फीति लक्ष्य अनिवार्य रूप से नहीं बदलेगा।
आरबीआई के साथ परामर्श के बाद सरकार हर पांच वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति का लक्ष्य तय करती है। एक अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 की मौजूदा अवधि के लिए चार प्रतिशत का लक्ष्य दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ निर्धारित किया गया है।
अमेरिकी प्रतिभूतियों में निवेश घटाने संबंधी सवाल पर गवर्नर ने कहा कि ऐसी कोई सचेत नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि सोने के भंडार के मूल्यांकन और अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के कारण आंकड़ों में बदलाव दिख रहा है।
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