नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और दो निजी स्कूलों से जुड़े बैंक खातों से कथित तौर पर 645 करोड़ रुपये के गबन से संबंधित धन शोधन जांच में तीसरी गिरफ्तारी की है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ईडी ने 29 मई को रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि वाधवा को अपराध से अर्जित धन के रूप में 70 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हुई और उन्होंने इस धन के सृजन, विभिन्न स्तरों पर उसके लेनदेन तथा उसे छिपाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ईडी ने कहा कि पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तारी के बाद, वाधवा को एक विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें दो जून तक चार दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।
ईडी के अनुसार, उसकी जांच में अब तक यह खुलासा हुआ है कि ‘‘हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन तथा चंडीगढ़ और पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खातों से 645 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि का गबन किया गया।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि वाधवा ने सह-आरोपी रिभव ऋषि, अभय कुमार, बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर धन की हेराफेरी की। ईडी ने कहा, ‘‘अपराध से अर्जित धन के सृजन, उसके लेन-देन और उसे छिपाने की प्रक्रिया में विक्रम वाधवा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।’’
ईडी ने इस मामले में ऋषि और कुमार को 11 मई को गिरफ्तार किया था। ग्यारह दिन की हिरासत में पूछताछ के बाद, दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
भाषा आशीष माधव
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