आईआईटी बंबई छात्र ‘आत्महत्या’ मामला : आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक राव प्रोफेसर डूला के समर्थन में आए

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आईआईटी बंबई छात्र ‘आत्महत्या’ मामला : आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक राव प्रोफेसर डूला के समर्थन में आए

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 09:52 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 09:52 PM IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) बिड़ला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स) पिलानी के कुलपति और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के पूर्व निदेशक वी रामगोपाल राव आईआईटी बंबई में बीटेक छात्र की मौत से जुड़े विवाद के बीच बुधवार को प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में आगे आए।

राव ने कहा कि वह इस बात से “दुखी” हैं कि डूला को “नकारात्मक रूप में पेश किया जा रहा है।” उन्होंने डूला के खिलाफ उठाए गए मुद्दों की निष्पक्ष जांच की मांग की।

आईआईटी बंबई ने बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की कथित आत्महत्या से जुड़ी परिस्तथितियों की जांच के लिए बुधवार को 10-सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति गठित की।

मामले में दर्ज प्राथमिकी में जातिगत भेदभाव के आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है। इसमें नामजद डूला को मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए छुट्टी पर भेज दिया गया है।

राव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आईआईटी बंबई में हालिया विवाद को लेकर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला की जिस तरह से आलोचना की जा रही है, उसे देखकर मुझे दुख हुआ है। मैं सूर्या को व्यक्तिगत रूप से जानता हूं। वह आईआईटी के सबसे बेहतरीन संकाय सदस्यों में से एक हैं और बहुत ही ईमानदार और नेक इंसान हैं। जो भी चिंताएं उठाई गई हैं, उनकी निष्पक्ष रूप से जांच होनी चाहिए। किसी व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक अभियान चलाने से किसी का भला नहीं होता।”

राव आईआईटी बंबई के छात्र रह चुके हैं। वह वहां अध्यापन कार्य भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा, “हम जो समस्याएं देख रहे हैं, वे मुख्य रूप से आईआईटी में अपनाए जाने वाले ‘सबके लिए एक ही तरीका’ वाले दृष्टिकोण का नतीजा हैं।”

राव ने कहा, “जबरदस्त कोचिंग संस्कृति से गुजरकर आने वाले छात्रों और एक ही कक्षा में जेईई एडवांस्ड रैकिंग में व्यापक भिन्नता वाले छात्रों की मौजूदगी (उदाहरण के लिए आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की कक्षा) के कारण अब पूरे आईआईटी तंत्र में कक्षाओं में बहुत ज्यादा विविधता देखने को मिलती है। भाषा की वजह से यह चुनौती और भी बढ़ जाती है।”

उन्होंने कहा, “इसलिए सवाल यह है कि इतनी विविधता के बीच, क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि हर छात्र एक ही रफ्तार से सीखेगा? अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए हमारे बेहतरीन संस्थानों के दरवाजे खोलने में कोई बुराई नहीं है। सवाल यह है कि क्या हमने अपने पढ़ाने और सिखाने के तरीकों में इस विविधता को ध्यान में रखा है।”

राव ने कहा कि कोई शिक्षक एक ही कक्षा में एक साथ कई स्तर पर नहीं पढ़ा सकता।

उन्होंने कहा, “अगर बहुत धीमी गति से पढ़ाया जाए, तो कुछ छात्रों की दिलचस्पी खत्म हो जाती है। अगर बहुत तेज गति से पढ़ाया जाए, तो कई छात्र पीछे छूट जाते हैं। मैंने अपनी कक्षाओं में ऐसे छात्रों को भी संघर्ष करते देखा है, जिन्होंने जेईई एडवांस्ड में बहुत अच्छी रैंक हासिल की थी। कोचिंग केंद्र ने उन्हें ऐसे सवालों को तेजी से हल करने के लिए तैयार किया था, जो वर्षों से पूछे जाते हैं।”

राव ने कहा, “जब छात्र ऐसा सवाल देखते हैं, जिसे उन्होंने पहले कभी हल नहीं किया होता, तो वे अक्सर उलझन में पड़ जाते हैं। यह समस्या किसी खास प्रवेश श्रेणी तक सीमित नहीं है। कोचिंग से तैयारी के बाद खुद से सीखने की ओर बढ़ना किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है।”

उन्होंने सुझाव दिया कि इस समस्या का एक समाधान बीटेक पाठ्यक्रम की अवधि बढ़ाकर पांच साल किया जाना हो सकता है।

राव ने कहा, “जो छात्र प्रदर्शन के पैमाने पर खरे उतरते हैं, वे इसे (पाठ्यक्रम) चार साल या शायद साढ़े तीन साल में पूरा कर सकते हैं। बाकी छात्र अपना पाठ्यक्रम पांच साल में पूरा कर सकते हैं और उन्हें ज्यादा अकादमिक मदद दी जा सकती है, जिसमें रिकॉर्ड किए गए लेक्चर, ऑनलाइन सामग्री और जरूरत पड़ने पर भाषा से जुड़ी मदद शामिल है।”

उन्होंने कहा, “पाठ्यक्रम की अवधि आईआईटी में छात्रों के प्रदर्शन से तय होनी चाहिए, न कि उनके दाखिले की श्रेणी या प्रवेश परीक्षा में हासिल रैकिंग से।”

भाषा पारुल अविनाश

अविनाश