चंडीगढ़, 27 सितंबर (भाषा) पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा एक छात्रा से ‘‘दुष्कर्म किए जाने के दावे’’ को लेकर परिसर में तोड़फोड़ की और राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर दिया।
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात भर चले हिंसक प्रदर्शन के बाद रविवार शाम पुलिस ने परिसर के बाहर सुबह आठ बजे से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 को अवरुद्ध कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। पुलिस ने उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि हालांकि, छात्रों ने पथराव शुरू कर दिया और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए, इसके बाद पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया।
उन्होंने बताया कि दो वाहनों में कथित तौर पर आग लगा दी गई, जबकि पत्रकार बचने के लिए भागते हुए दिखे। जालंधर ग्रामीण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हरविंदर सिंह विर्क ने कहा कि हिंसा में चार से पांच पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचा है।
पुलिस ने बताया कि छात्रों की शिकायत पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है और मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में दुष्कर्म की किसी घटना के दावों को ‘‘अफवाह’’ बताते हुए खारिज कर दिया।
यह घटना पटियाला स्थित चितकारा विश्वविद्यालय के छात्रों के बड़े प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई, जहां कथित तौर पर परिसर में दो छात्राओं की आत्महत्या के अपुष्ट दावों को लेकर छात्रों ने एक पुलिस वाहन में आग लगा दी थी।
फगवाड़ा में विश्वविद्यालय परिसर में नाटकीय दृश्य देखने को मिला, जहां एक छात्र परिसर में रखे सेवा से हटाये गए मिग-23यूएम विमान के ऊपर चढ़ गया, जबकि कुछ अन्य छात्र एक सैन्य टैंक पर चढ़ गए।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एलपीयू के छात्र कथित तौर पर खिड़कियों के शीशे एवं गमले तोड़ते और कुछ वस्तुओं में आग लगाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं ‘‘हमें न्याय चाहिए’’ के नारे पृष्ठभूमि में गूंज रहे थे।
प्रदर्शनकारियों ने परिसर के बाहर दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के एक हिस्से को भी अवरुद्ध कर दिया, जिससे भारी यातायात जाम लग गया।
प्रदर्शन विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास के पास शनिवार देर रात करीब एक बजे शुरू हुआ। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि छात्रावास में रहने वाली एक छात्रा से तीन दिन पहले एक ‘प्लंबर’ ने दुष्कर्म किया था।
छात्रों ने यह भी दावा किया कि छात्रावास वार्डन को इस बारे में सूचित किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस ने छात्रों की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म के आरोप में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है और दावों की जांच के लिए एसआईटी गठित की है।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने हालांकि, एक बयान में कहा कि ‘‘अफवाहों’’ में कोई सच्चाई नहीं है। विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व ‘‘झूठे’’, ‘‘बेबुनियाद’’ और ‘‘मनगढ़ंत’’ आरोप फैला रहे हैं।
एलपीयू ने गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में रहने वाली तीन छात्राओं का एक वीडियो बयान भी जारी किया, जिसमें दावा किया कि दुष्कर्म की कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि वे पिछले दो महीने से वहां रह रही हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में कथित प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालय के मॉल की दुकानों में और परिसर की अन्य संपत्तियों में तोड़फोड़ करते दिखे। प्रदर्शनकारियों के चेहरे रूमाल से ढके हुए थे, कुछ अन्य लोग किराना दुकान से सामान उठाते हुए भी नजर आए। वीडियो में परिसर में क्षतिग्रस्त वाहन और टूटा एटीएम कियोस्क भी दिखा।
नाकेबंदी रविवार शाम तक जारी रहने के कारण फगवाड़ा राजमार्ग से यातायात को जालंधर की ओर जाने के लिए फगवाड़ा-जंडियाला मार्ग और अन्य अंदरूनी सड़कों की ओर मोड़ दिया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। कई फंसे हुए यात्रियों की प्रदर्शनकारियों से बहस भी हुई और कुछ ने उनसे रास्ता खोलने का अनुरोध किया, ताकि वे आगे जा सकें।
प्रदर्शनकारी छात्रों और एलपीयू प्रबंधन के बीच कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही, हालांकि एलपीयू के कुलपति जसपाल सिंह संधू ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी वास्तविक शिकायतों का समाधान किया जाएगा।
प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े रहे कि एलपीयू के संस्थापक-कुलाधिपति अशोक मित्तल प्रदर्शन स्थल पर आएं और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दें। मित्तल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य भी हैं।
उन्होंने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली, जो उन्हें विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियों तक पहुंच प्रदान करती है, को बंद नहीं किया जाए और प्रदर्शन करने के कारण उन्हें (प्रदर्शनकारियों को) प्रताड़ित नहीं किया जाए।
तोड़फोड़ की खबरों के बाद कपूरथला, जालंधर ग्रामीण और होशियारपुर से बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
स्थिति रविवार शाम करीब 7.30 बजे उस समय और बिगड़ गई, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सड़क जाम हटाने के लिए समझाने की कोशिश की। इसके बजाय प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बोतलें फेंकी, जिसके बाद पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया, जिसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि गुस्साए छात्रों ने राजमार्ग पर पथराव किया और पुलिस वाहनों को निशाना बनाया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कुछ वाहनों में आग भी लगा दी।
तोड़फोड़ की खबरों के बाद कपूरथला, जालंधर ग्रामीण और होशियारपुर से बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर भेजा गया।
मौके पर पहुंचे जालंधर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) नवीन सिंगला ने कहा कि छात्रों का दावा है कि हॉस्टल में रहने वाली छात्रा मामले में कार्रवाई नहीं होने के बाद अपने घर लौट गई।
डीआईजी ने कहा कि छात्रों के बयान के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का भी गठन किया गया है और छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर जांच की जाएगी।
सिंगला ने कहा कि छात्रों की कुछ अन्य मांगें भी हैं, जिनको लेकर एलपीयू प्रबंधन के साथ बैठक निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा, ‘‘किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हम फॉरेंसिक नमूनों, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, कॉल रिकॉर्ड आदि का विश्लेषण करेंगे।’’
डीआईजी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि छात्राएं मांग कर रही हैं कि पूरे हॉस्टल स्टाफ में केवल महिलाएं हों। उन्होंने कहा, ‘‘प्रबंधन इन मांगों पर ध्यान देगा।’’
एक अन्य सवाल के जवाब में डीआईजी ने कहा कि एलपीयू में पढ़ने वाली तेलंगाना की एक छात्रा ने 15 दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने कहा, ‘‘यदि छात्राएं कहती हैं कि इसमें कोई गड़बड़ी हुई है तो कार्रवाई की जाएगी।’’
दुष्कर्म के छात्रों के दावे पर एलपीयू के कुलपति जसपाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है और जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
इससे पहले कपूरथला के एसएसपी गौरव तूरा ने कहा, ‘‘हमने उन छात्रों से बात की है, जिन्हें एलपीयू प्रशासन से कुछ शिकायतें थीं। उन्हें हल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
एलपीयू प्राधिकारियों ने दावा किया कि कुछ असामाजिक तत्व विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ने के लिए छात्रों के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय ने बयान में कहा कि यह ‘‘विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और उसकी छवि खराब करने की जानबूझकर की गयी सुनियोजित साजिश’’ प्रतीत होती है।
बयान में कहा गया, ‘‘छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अनुरोध है कि वे ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें, उन्हें प्रसारित या बढ़ावा न दें। उन्हें विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों से दी जाने वाली जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।’’
भाषा अमित सुरेश
सुरेश