पंजाब चुनाव में भाजपा का जोर नशे की समस्या, धर्मांतरण से निपटने पर होगा
पंजाब चुनाव में भाजपा का जोर नशे की समस्या, धर्मांतरण से निपटने पर होगा
नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में नशे की समस्या, धर्मांतरण और ‘‘ठहरी हुई’’ आर्थिक वृद्धि से निपटना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल होगा।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा राज्य में आम आदमी पार्टी (आप) को सत्ता से बाहर करने की कोशिश के तहत, भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के शासन में ‘‘हत्या के बढ़ते मामलों और गैंगस्टर के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर’’ भ्रष्टाचार तथा ‘‘बिगड़ती’’ कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी अपने चुनाव प्रचार में मजबूती से उठाएगी।
पंजाब में विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं और भाजपा इस सीमावर्ती राज्य में ‘आप’ से सत्ता हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती।
पार्टी के एक सूत्र ने कहा, ‘‘हम पंजाब चुनाव धर्मांतरण, नशे और ठहरी हुई आर्थिक वृद्धि के मुद्दे पर लड़ेंगे।’’
पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि भाजपा पंजाब विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। इससे पहले भाजपा का शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के साथ गठबंधन था लेकिन बाद में तीन कृषि कानूनों को लेकर मतभेदों के बाद शिअद इस गठबंधन से अलग हो गया था। इन कानूनों को बाद में वापस ले लिया गया था।
भाजपा ने 2027 के पंजाब चुनावों की तैयारी पहले ही शुरू कर दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च में मोगा में हुई ‘‘बदलाव’’ रैली के दौरान चुनावी बिगुल फूंका था। उन्होंने इस रैली में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या, धर्मांतरण और भ्रष्टाचार के मुद्दों को रेखांकित करते हुए मान सरकार पर तीखा हमला किया था।
पश्चिम बंगाल में अपनी प्रभावशाली जीत के बाद भाजपा का ध्यान अब पंजाब पर केंद्रित हो गया है, जहां उसने हाल में जाट सिख नेता केवल सिंह ढिल्लों को पार्टी की राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
बरनाला से दो बार कांग्रेस विधायक रह चुके ढिल्लों 2022 में भाजपा में शामिल हुए थे और बाद में उन्हें पार्टी की राज्य इकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
भाजपा पंजाब में मतदाताओं से अपील कर रही है कि वे कभी आर्थिक मोर्चे पर अग्रणी रहे इस सीमावर्ती राज्य में स्पष्ट बदलाव लाने का उसे मौका दें।
भाजपा का मनोबल हाल में तब और बढ़ा, जब राघव चड्ढा समेत पंजाब से ‘आप’ के सात राज्यसभा सदस्य अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल हो गए।
पार्टी के एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘हमें खासकर पश्चिम बंगाल में जीत के बाद, पंजाब में अपने पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है।’’
‘आप’ ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में 117 सदस्यीय विधानसभा में 92 सीट जीतकर जबरदस्त जीत दर्ज की थी और मान के नेतृत्व में सरकार बनाई थी। भाजपा ने 73 सीट पर चुनाव लड़ा था लेकिन उसे केवल दो सीट मिलीं और उसका मत प्रतिशत 6.6 रहा।
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा और वह 13 में से कोई भी सीट नहीं जीत सकी लेकिन उसे 18.65 प्रतिशत मत मिले।
पार्टी के एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘हम पिछले विधानसभा चुनावों के बाद से जमीनी स्तर पर लगातार काम कर रहे हैं और जमीन पर उल्लेखनीय सुधार हुआ है जो पंजाब में पिछले लोकसभा चुनावों में पार्टी के मत प्रतिशत में दिखता है।’’
भाजपा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को भी अहम भूमिका दे सकती है जिनका नाम 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची में नहीं है। बिट्टू का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ को भी राज्य में कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सूत्रों ने कहा कि पार्टी चुनाव से पहले प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवारों की तलाश कर रही है और इस संबंध में जमीनी सर्वेक्षण करा रही है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के भी इस महीने के अंत में राज्य का दौरा करने की संभावना है ताकि पार्टी के प्रचार अभियान को गति दी जा सके।
भाषा सिम्मी माधव
माधव

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